बिहार विधान सभा के अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार ने अंडमान-निकोबार प्रवास के दौरान पोर्ट ब्लेयर स्थित ऐतिहासिक सेल्यूलर जेल एवं जिला परिषद, दक्षिण अंडमान परिसर में स्थापित स्वतंत्रता संग्राम के महानायक वीर स्वतंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर जी की नव-स्थापित आदमकद प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों को पूरा राष्ट्र श्रद्धापूर्वक नमन करता है। सेल्यूलर जेल जैसे ऐतिहासिक स्थल हमें त्याग, साहस, संघर्ष और राष्ट्रप्रेम की अमर गाथा का निरंतर स्मरण कराते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान सदैव हमें राष्ट्रहित में समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।
उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक को यह जानना आवश्यक है कि भारत को आजादी कैसे मिली और अंग्रेजी शासन के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों को किस प्रकार की अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। “काला पानी” की सजा केवल एक दंड नहीं, बल्कि अंग्रेज हुकूमत की घोर क्रूरता का प्रतीक थी। इसके बावजूद राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत वीरों ने इन यातनाओं को हंसते-हंसते सहा और अंततः अपने अदम्य साहस व बलिदान से देश को स्वतंत्रता दिलाई।

वीर सावरकर जी को स्मरण करते हुए डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग और वैचारिक दृढ़ता का प्रतीक है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
इसके उपरांत डॉ प्रेम कुमार ने पोर्ट ब्लेयर स्थित फ्लैग प्वाइंट का भी भ्रमण किया, जहां वर्ष 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने पहली बार भारत माता का तिरंगा फहराया था। उन्होंने कहा कि यह स्थल देशवासियों में स्वाभिमान, आत्मगौरव और राष्ट्रप्रेम की भावना को और सशक्त करता है।
डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार आवश्यक है ताकि युवा पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सके।
