बिहार राज्य किसान सभा के अध्यक्ष सीताराम शर्मा और महासचिव रामचन्द्र महतो ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि शहीद ए आजम भगत सिंह की जयंती के मौके पर 28 सितंबर को बाढ़-सूखा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग, केंद्र व राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों व टाउनशिप योजना के खिलाफ पटना में किसानों की महजुटान होगी। किसान अपनी मांगों को लेकर राजभवन को घेरेंगे।
किसान नेताओं ने कहा कि
जनादेश की अवहेलना कर बिहार में बनी भाजपा की सरकार ने जनता पर कहर ढ़ाना शुरू कर दिया है।पूरे बिहार बाढ़ और सूखे की चपेट में हैं। किसानों को।फसल का मुआवजा नहीं मिल रहा है। डबल इंजन की सरकार किसानों पर कहर ढा रही है। सेटेलाइट टाऊनशीप के नाम पर बिहार के किसानों की लाखों एकड़ जमीन अडानी/अंबानी सहित अन्य कारपोरेट घरानों को सौंपने का खेल शुरू हो गया है। महंगाई, भ्रष्टाचार, हत्या अपराध बिहार में बढ़ रहा है। कहीं पुलिस द्वारा फर्जी एनकाउंटर कर आमलोगों की हत्या की जा रही है तो दलितों को मंदिर में पीट पीट कर हत्या की जा रही है।बिहार के प्रशासनिक नौकरशाह-सत्ता संपोषित ठेकेदार तथा सफेदपोश सत्ताधारी राजनेताओं के गठजोड़ की कलई खुल रही।
किसान नेताओं ने कहा कि डबल इंजन सरकार में किसान गंभीर संकट का सामना कर रहा है।विभिन्न जनसंगठनों द्वारा किसान तथा कृषि विरोधी विभिन्न कानूनों, युवा-छात्र विरोधी गलत शिक्षा एवं रोजगार नीतियों के खिलाफ 28 सितंबर 2026 को आक्रोश पूर्ण राजभवन मार्च का आह्वान किया गया है। यह मार्च ऐतिहासिक होगा। इसकी व्यापक तैयारी की जायेगी। किसान अधिक फसलों के लिए एमएसपी के विस्तार, एमएसपी की कानूनी गारंटी, और उर्वरकों और अन्य आवश्यक इनपुट की सस्ती और सुनिश्चित आपूर्ति की मांग कर रहे हैं।
