डॉ. ए. के. नायक, उप महानिदेशक, आईसीएआर, नई दिल्ली द्वारा “प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से संबंधित कृषि अनुसंधान रोडमैप @2047” पर जोर
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने 22 फरवरी, 2026 को अपना 26वाँ स्थापना दिवस पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया, जिसमें संस्थान ने पूर्वी भारत के लिए टिकाऊ एवं जलवायु-अनुकूल कृषि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। सथापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. ए. के. नायक, उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली उपस्थित रहे। साथ ही, विशिष्ट अतिथियों में डॉ. अंजनी कुमार, निदेशक, अटारी, पटना; डॉ. ए. के. सिंह, निदेशक अनुसंधान, बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर; डॉ. एस. के. पूर्वे, निदेशक, महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान ; डॉ. आर. के. जाट, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक, बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया; तथा श्री डी. पी. त्रिपाठी, निदेशक, बामेती शामिल थे।

अपने संबोधन में डॉ. ए. के. नायक ने संस्थान के वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को पूर्वी भारत में किसानों की 25 वर्षों की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए बधाई दी। इस अवसर पर उन्होंने “विकसित भारत के लिए प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से संबंधित कृषि अनुसंधान रोडमैप @2047” विषय पर स्थापना दिवस व्याख्यान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने विकसित भारत @2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की भावी रणनीति को स्पष्ट किया। उन्होंने भूमि क्षरण तटस्थता, कार्बन क्रेडिट तंत्र के विकास, स्मार्ट एवं सतत् जल प्रबंधन, उर्वरकों एवं पोषक तत्वों में आत्मनिर्भरता तथा जैव विविधता संरक्षण पर विशेष बल दिया। साथ ही, उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे जलवायु-अनुकूल एवं जैव-संवर्धित फसल किस्मों के विकास को प्राथमिकता देते हुए पोषण, खाद्य एवं जल सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएँ।

संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के स्वर्णिम 25 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. दास ने अपने संबोधन में बताया कि संस्थान ने प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में अनेक महत्त्वपूर्ण एवं उपयोगी प्रौद्योगिकियों का विकास किया है। इनमें प्रमुख रूप से समेकित कृषि प्रणाली, धान परती भूमि प्रबंधन, फसल विविधीकरण, स्मार्ट जल प्रबंधन, फल-आधारित भू-उपयोग मॉडल तथा कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों का पुनर्स्थापन शामिल हैं। साथ ही, संस्थान ने 12 जलवायु-सहिष्णु धान, 1 चना, 63 सब्जी, 2 बाकला तथा 6 फल किस्में विकसित कर क्षेत्रीय खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ किया है। पूर्णिया गाय, मेदिनी गाय, पलामू बकरी, माला मुर्गी, मैथिली बत्तख और कोड़ो बत्तख जैसे पशुधन आनुवंशिक संसाधनों का पंजीकरण कर संरक्षण को नई दिशा दी गई।
बामेती निदेशक श्री डी. पी. त्रिपाठी ने तकनीक प्रसार के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रभाव-उन्मुख विस्तार रणनीतियाँ ही यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि वैज्ञानिक उपलब्धियाँ किसानों तक वास्तविक लाभ के रूप में पहुँचे |
विशिष्ट अतिथिगण डॉ. अंजनी कुमार, डॉ. ए. के. सिंह, डॉ. एस. के. पूर्वे एवं डॉ. आर. के. जाट ने अपने संबोधन में संस्थान परिवार को स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने पूर्वी राज्यों के किसानों के हित में संस्थान द्वारा किए गए उल्लेखनीय अनुसंधान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

इससे पूर्व, स्थापना दिवस कार्यक्रम के अंतर्गत उप महानिदेशक ने प्रातः सबजपुरा प्रक्षेत्र एवं संस्थान के प्रायोगिक खेतों जैसे स्मार्ट जल प्रबंधन मॉडल, संरक्षण कृषि, कृषिवानिकी मॉडल आदि का भ्रमण कर प्रगतिशील अनुसंधानों की समीक्षा की तथा उनके सुधार हेतु महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
कार्यक्रम के अंतर्गत नवाचारी कृषक सम्मेलन का भी आयोजन किया गया, जिसमें उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही, विभिन्न संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किए गए | किसानों के बीच अनुसंधान-आधारित ज्ञान के प्रसार हेतु हिंदी में विभिन्न पुस्तकों का विमोचन किया गया। लोकनृत्य एवं लोकगीतों सहित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को जीवंत बनाया, जबकि किसान–वैज्ञानिक संवाद सत्रों ने ज्ञान एवं अनुभवों के सार्थक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों, मीडियाकर्मियों तथा संस्थान के उत्कृष्ट कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। देश के 11 राज्यों से आए 300 से अधिक किसानों सहित लगभग 650 विभिन्न हितधारकों ने इस समारोह में उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने फील्ड अनुभवों, नवाचारों एवं उपयोगी सुझावों को साझा किया। कार्यक्रम का समापन आयोजन सचिव डॉ. ए. के. चौधरी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ संपन्न हुआ।
