डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव को देखते हुए आज बिहार विधान परिषद, पटना में “साइबर सुरक्षा एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जागरूकता कार्यशाला” का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विधान परिषद के माननीय सदस्यों को डिजिटल सुरक्षा, साइबर अपराध से बचाव तथा उभरती तकनीकों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का आयोजन The Asia Foundation के सहयोग से किया गया, जबकि इसके आयोजन में जन जागरण संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम को तकनीकी सहयोग DeepCytes द्वारा प्रदान किया गया। यह पहल डिजिटल युग में जनप्रतिनिधियों और सार्वजनिक संस्थानों को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधान परिषद् के सभापति माननीय श्री अवधेश नारायण सिंह, बिहार विधान परिषद् के सचिव, The Asia Foundation की इंडिया हेड सुश्री नंदिता बरुआह, जन जागरण संस्थान के प्रमुख श्री वाई.के. गौतम, DeepCytes के सह-संस्थापक श्री शुभम पारेख तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. मनीष प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर बिहार विधान परिषद् के उपसभापति प्रो. (डॉ.) रामबचन राय, विधान पार्षद श्री संजीव कुमार सहित परिषद् के कई माननीय सदस्य उपस्थित रहे और उन्होंने डिजिटल सुरक्षा तथा नई तकनीकों के सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद एक महत्वपूर्ण पहल के तहत विधान परिषद् एवं विधानसभा के सदस्यों के लिए तैयार की गई साइबर सुरक्षा मैनुअल का भी औपचारिक लोकार्पण किया गया।

कार्यशाला के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की विशेषता लाइव डेमोंस्ट्रेशन और साइबर ड्रिल रही, जिसमें निम्न विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया—
• रियल-टाइम साइबर रिस्क असेसमेंट – डिजिटल सिस्टम में संभावित खतरों की पहचान
• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं डीपफेक तकनीक – यह दिखाया गया कि किस प्रकार AI की मदद से किसी व्यक्ति की पहचान या आवाज़ का दुरुपयोग किया जा सकता है
• फिशिंग और ऑनलाइन फ्रॉड से बचाव – संदिग्ध ई-मेल, लिंक और मैसेज की पहचान और उनसे बचने के उपाय
विशेषज्ञों ने बताया कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग साइबर हमलों के सबसे बड़े लक्ष्यों में होते हैं, इसलिए उनके लिए डिजिटल सुरक्षा की समझ केवल व्यक्तिगत सुरक्षा ही नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी चर्चा की गई कि बिहार में युवाओं के लिए साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित प्रभावी नीतियाँ कैसे विकसित की जा सकती हैं, ताकि युवाओं को सुरक्षित डिजिटल वातावरण के साथ नई तकनीकों के अवसर भी मिल सकें।
कार्यक्रम का संचालन The Asia Foundation की प्रतिनिधि द्वारा किया गया, जबकि जन शिक्षण संस्थान के आदित्य गौतम ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों, विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यशाला के पहले दिन के सफल आयोजन के बाद यह तय किया गया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 11 मार्च 2026 को भी जारी रहेगा, ताकि बिहार के जनप्रतिनिधि डिजिटल युग की चुनौतियों के प्रति और अधिक सजग एवं सक्षम बन सकें।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि आज के समय में लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड और डिजिटल जागरूकता उतनी ही आवश्यक है जितनी सुरक्षित मतपेटी।
