भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में दिनांक 17 अप्रैल, 2026 को गोपाल नारायण सिंह विश्वविद्यालय, रोहतास के बी.एससी. (कृषि) के 42 विद्यार्थियों के लिए प्रशिक्षण-सह-प्रक्षेत्र भ्रमण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने संस्थान में संचालित विभिन्न अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों का अवलोकन किया तथा उर्वरकों के संतुलित उपयोग के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।

कार्यक्रम के दौरान संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. आशुतोष उपाध्याय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग तथा हरी खाद के प्रयोग की महत्ता पर विशेष बल देते हुए बताया कि संस्थान द्वारा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने तथा हरी खाद एवं जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने हेतु व्यापक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर डॉ. संजीव कुमार, प्रमुख, फसल अनुसंधान ने संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न कृषि प्रौद्योगिकियों की जानकारी देते हुए कहा कि बिना मृदा परीक्षण के उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग मृदा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के साथ-साथ उत्पादन लागत को भी बढ़ाता है। उन्होंने आधुनिक तकनीकों, समेकित कृषि प्रणाली, फसल विविधीकरण एवं दलहनी फसलों के समावेश को अपनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं व्यावहारिक ज्ञान के माध्यम से ही कृषि क्षेत्र में वास्तविक प्रगति संभव है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि असंतुलित उर्वरक उपयोग के कारण मृदा उर्वरता में गिरावट एवं खेती की लागत में वृद्धि जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके समाधान हेतु जैविक एवं रासायनिक उर्वरकों के समेकित उपयोग तथा मृदा परीक्षण आधारित प्रबंधन प्रणाली को अपनाना अनिवार्य है।
विद्यार्थियों ने संस्थान के प्रायोगिक प्रक्षेत्र का भ्रमण किया, जहाँ उन्हें विभिन्न अनुसंधान प्रयोगों का प्रत्यक्ष अवलोकन करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस दौरान उन्होंने फसल प्रबंधन, उर्वरक परीक्षण, फसल विविधीकरण तथा उन्नत कृषि तकनीकों से संबंधित चल रहे प्रयोगों को नजदीक से समझा। इस प्रक्षेत्र भ्रमण से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ, जिससे उनकी कृषि संबंधी समझ और अधिक सुदृढ़ हुई। इस अवसर पर डॉ. अजय कुमार, डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. कुमारी शुभा, डॉ. एस. अहिरवाल, डॉ. राकेश कुमार एवं श्री अभिषेक कुमार सहित संस्थान के अन्य वैज्ञानिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। इस प्रकार, संस्थान द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि संतुलित उर्वरक उपयोग एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभरा।
