रात के ठीक 11:00 बजे थे, जब मेरे फोन की Screen पर एक नाम उभरता है—बिहार के मुख्यमंत्री, सम्राट चौधरी।
मैं कुछ पलों के लिए विस्मय में पड़ गया। पिछले दस वर्षों में सम्राट जी और मेरे बीच कभी फोन पर कोई संवाद नहीं हुआ था, फिर आज अचानक यह कॉल? सार्वजनिक जीवन में कई बार आमना-सामना हुआ, लेकिन वह केवल औपचारिक शिष्टाचार और ‘दुआ-सलाम’ तक ही सीमित रहा। हालाँकि, पूज्य बाबा के साथ उनके संबंध सदैव एक अभिभावक जैसे रहे हैं, परंतु मेरे साथ उनका नाता केवल प्रोफेशनल ही रहा। जब वे BJP अध्यक्ष बने या जब उन्होंने Deputy CM पद की शपथ ली, तब भी हमारी बातचीत केवल औपचारिक बधाई तक ही सिमटी रही। दो-दो चुनाव बीत गए, पर कभी संवाद की आवश्यकता महसूस नहीं हुई। तो फिर आज यह फोन क्यों?
पत्रकारिता के इस कठोर पेशे में, जहाँ मेरी लेखनी और स्वर अक्सर सत्ता की विसंगतियों पर प्रहार करते हैं, मैंने मित्र कम और शत्रु अधिक अर्जित किए हैं। मेरी भाषा अभद्र नहीं होती, पर उसमें निहित सत्य इतना कठोर होता है कि वह सत्ता के गलियारों में चुभने के लिए पर्याप्त है। परसों जब उनका फोन आया, तो इन्ही विचारों के बीच कॉल छूट गई। मुझे लगा संभवतः उनसे गलती से लग गया होगा। परंतु जब दोबारा फोन की घंटी बजी, तो मैं समझ गया कि यह संयोग नहीं, संकेत है।
फोन उठाते ही दूसरी ओर से वही चिर-परिचित कड़क लेकिन स्नेहपूर्ण आवाज़ गूंजी— कैसे हैं नमन बाबू? Patna या Dubai?
मैंने उत्तर दिया कि फिलहाल पटना में ही हूँ, लेकिन माह के अंत तक संभवतः Dubai जाना हो, क्योंकि युद्ध (War) की परिस्थितियों के कारण कुछ कर्मचारियों की Onboarding और Paychecks का कार्य लंबित है। इसके बाद उन्होंने जो कहा, वह एक राजनेता की परिपक्वता का परिचायक था। उन्होंने कहा, *”आपका ‘पंचनामा’ देखा। आपने जो सवाल पूछे हैं और जो आरोप लगाए हैं, वे अपनी जगह जायज हैं। वह आपका काम है और आप उसे बखूबी निभा रहे हैं। लेकिन बिहार के विकास और Horizontal Growth के लिए हम सभी भाइयों को साथ आना होगा। मैं दिल्ली से लौट रहा हूँ, आप चाय पर आइए डॉक्टर साहब।
आगे उन्होंने कहा – आप निश्चित मेरी धज्जियाँ उड़ाइए, मेरी कमियां निकालिए, मुझे कोई आपत्ति नहीं है; लेकिन बिहार के सामने ‘ताड़का’ की भांति जो समस्याएँ मुंह बाए खड़ी हैं, अब उनके समाधान का समय आ गया है। इसके लिए बिहार और बिहार से बाहर रह रहे हर बिहारी को एक एकीकृत प्रयास (Integrated Effort) करना होगा।”*
मैं स्वयं को पत्रकारिता का ‘भीष्म पितामह’ या कोई बड़ा मठाधीश नहीं मानता, लेकिन अपने कड़े तेवरों के लिए ‘कुख्यात’ अवश्य हूँ। ऐसे में प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री का स्वयं फोन करना और एक आलोचक को इतनी सहजता के साथ ‘चाय पर चर्चा’ के लिए आमंत्रित करना, न केवल गर्व का विषय है बल्कि उनकी प्रतिबद्धता और राजनीतिक संस्कारों का एक सकारात्मक ‘Trailer’ भी है।
मुलाकात का समय यद्यपि 25-26 अप्रैल तय हुआ था, परंतु उनके व्यस्त कार्यक्रम और मेरे दुबई प्रवास के बीच आज अचानक एक ‘Meeting Window’ निकल आई और उन्होंने आज ही बुला लिया। लगभग आधे घंटे की इस मुलाकात में हमने बिहार में Industrialization से लेकर Tourism और EV Market की संभावनाओं पर गहन चर्चा की।
एक पत्रकार के साथ-साथ एक Engineer होने के नाते, नव-निर्माण और सृजन के प्रति मेरी रुचि स्वाभाविक है। बहुत कम लोग जानते हैं कि हाल के वर्षों में मैंने अपनी कंपनी ‘Perry & Sawyer M&C’ के माध्यम से बिहार को विश्व मानचित्र पर स्थापित करने का एक दृढ़ संकल्प लिया है। Dubai, Australia और UAE सहित USA से बिहार को सीधे व्यापारिक माध्यमों से जोड़ने के मेरे प्रयासों की मुख्यमंत्री जी ने मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने Video Call के माध्यम से मेरे भाई प्रकाश से भी संवाद किया, जो Dubai में बिहारी Diaspora G3 का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस मुलाकात को राज्य में निवेश (Investment), Infrastructure और औद्योगीकरण के नए युग की शुरुआत की दिशा में एक ‘Roadmap’ के रूप में देखा जा सकता है।
बैठक के मुख्य बिंदु और महत्वपूर्ण सुझाव:
G3 मॉडल पर संवाद: प्रदेश की आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए *G3 (Grow Global Group)* के विजन— *Growth, Governance, and Globalization* पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री जी ने साझा किया कि सुशासन और वैश्विक मानकों (Global Standards) के साथ बिहार का विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट का केंद्र: बिहार अब दुनिया भर के निवेशकों की पसंद बन रहा है। Australia, UK, Dubai और USA के बड़े निवेशक जल्द ही बिहार में अपनी पैठ जमाने को तैयार हैं।

पूर्णिया बनेगा ‘EV Hub’: चर्चा में पूर्णिया को एक औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया गया। हमारा सुझाव था कि पूर्णिया को *Electric Vehicle (EV) Manufacturing Hub* बनाया जाए और देश की ‘Top 5’ Automobile कंपनियों को वहां Industry सेटअप करने के लिए विशेष रियायतें दी जाएं।
Satellite Township और P2 मॉडल: पटना में प्रस्तावित 11 नई Satellite Townships सरकार का सराहनीय कदम है। इसके साथ ही मैंने सुझाव दिया कि ‘Pre-existing’ (पुरानी) टाउनशिप्स की अनदेखी न हो। सरकार *P2 (Public-Private Partnership)* मॉडल के जरिए पुरानी टाउनशिप्स में भी आधुनिक Amenities और Infrastructure विकसित करे, ताकि नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।
पर्यटन कॉरिडोर (Tourism Corridor): राज्य के राजस्व में वृद्धि के लिए पटना से पूर्णिया और बक्सर से भागलपुर तक ‘पर्यटन कॉरिडोर’ विकसित करने पर चर्चा हुई। इन रूट्स को वैश्विक मानचित्र पर लाकर बिहार की ऐतिहासिक पहचान को आर्थिक शक्ति में बदलने का लक्ष्य है।
स्थानीय रोजगार: मुख्यमंत्री जी ने आश्वस्त किया कि इन सभी परियोजनाओं का मूल उद्देश्य बिहार के युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर लाखों रोजगार (Employment) के अवसर सृजित करना है।
संवाद के अंत में, हमने बिहार के विकास और आत्मनिर्भरता के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता को दोहराया। भविष्य में बड़े वैश्विक कॉर्पोरेट घरानों को बिहार आमंत्रित करने के लिए ‘G3’ की भूमिका पर भी विमर्श हुआ। साथ ही, उन्होंने शीघ्र ही Dubai में अप्रवासी बिहारियों के साथ Meet & Greet कार्यक्रम के लिए अपनी सहमति प्रदान की।
मैंने भारतीय संविधान की प्रति और बाबा भीमराव के भाव से प्रेरित अंगवस्त्र से उन्हें सम्मानित किया। इस लंबे और उद्देश्यपूर्ण संवाद के बीच हमारी चाय छूट गई। अब उस उधार चाय को पाइन के लिए कुछ ठोस roadmap के साथ फिर एक बार मुख्यमंत्री जी के पास जल्दी ही जाना होगा।
निश्चित ही, यह बिहार के लिए ‘आर्थिक न्याय’ का दौर है। एक पत्रकार के साथ-साथ एक युवा International Entrepreneur के रूप में मुझे सम्राट चौधरी जी से बहुत उम्मीदें हैं। आज की इस सार्थक मुलाकात के बाद, 14 करोड़ बिहारियों के स्वर्णिम भविष्य के लिए एक नई आशा अवश्य जागी है।
