जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के विरोध में दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा है कि तेजस्वी जी के खिलाफ कोई भी प्रतिक्रिया देने के पहले कुशवाहा जी को तेजस्वी जी द्वारा कही बातों को ठीक से पढ़ लेना और उसे ठीक से समझ लेना चाहिए। उन्हें नहीं भूलना चाहिए कि जिस राजद शासनकाल को वे जंगलराज कह रहे हैं , उस समय वे राजद के हीं सदस्य थे और 2005 में विधानसभा का चुनाव भी वे राजद उम्मीदवार के रूप में हीं लड़े थे।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी जी द्वारा कोई भी मुद्दा क्यों न उठाया जाए , जदयू के प्रदेश अध्यक्ष द्वारा केवल डेट बदलकर एक हीं घीसा-पीटा बयान को बार-बार दोहराया जाता है। जबकि सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष के नाते उन्हें उन मुद्दों पर जबाब देना चाहिए जिसे तेजस्वी जी या अन्य विपक्षी नेताओं द्वारा उठाया जाता है। वास्तविकता यह है कि तेजस्वी जी द्वारा कानून व्यवस्था, महिलाओं की स्थिति, नौकरी और रोजगार, महंगाई, सरकार द्वारा किए गए वादे की जमीनी हकीकत जैसे मुद्दों पर जब सरकार से सवाल किया जाता है तो सत्ता में बैठे लोगो के पास उसका कोई सार्थक जवाब है हीं नहीं तो फिर बोलेंगे क्या।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा जी हमारे पुराने साथी हैं। 2001 में हम दोनों एक साथ जिला परिषद के सदस्य रह चुके हैं। एक हीं जिला के हैं और काफी दिनों तक हम दोनों एक हीं दल में भी रहे हैं। इसलिए उनके द्वारा दिए जा रहे फ़ूहड़ बयानों को देखकर हैरानी होती है। यह बात सही है कि जदयू का पूर्णतः भगवाकरण हो गया है और दल का अस्तित्व अब केवल कागजी रह गया है फिर भी उसके प्रदेश अध्यक्ष जैसे सम्मानित और जिम्मेदार पद पर बैठे हुए व्यक्ति द्वारा नेता प्रतिपक्ष और राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के खिलाफ दिए गए बयान को तथ्यात्मक और मर्यादित होना चाहिए। हां, यदि उनके अंदर भी भाजपा की आत्मा का प्रवेश हो गया हो अथवा उनका बयान भी भाजपा कार्यालय से हीं जारी होता हो तब तो कोई बात हीं नहीं है।
