भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लाभार्थियों को केंद्र सरकार द्वारा अनाज के बजाए डिजिटल करेंसी देने के फैसले की कड़ी निंदा की है और इस फैसले को वापस लेने की मांग की हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का राशन वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने की घोषणा सिर्फ बहाना है। सरकार का मुख्य उद्देश्य जन वितरण प्रणाली को बंद करना हैं। योजना लागू होने से पहले ही बिहार में 35 लाख राशन कार्ड रद्द कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने अब जन वितरण प्रणाली में डिजिटल करेंसी (ई-रूपी/डिजिटल वाउचर) का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। यह डिजिटल करेंसी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जायेगी। इस निर्णय के लागू होने से गरीबों की पहुँच से अनाज दूर हो जाएगा और देश में फिर से भूखमरी का संकट पैदा हो जायेगा।

भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि संयुक्त मोर्चे की सरकार ने 1997 में एपीएल और बीपीएल योजना लागू की थी और लाभार्थियों को दो रुपये किलों गेहूं और तीन रुपये किलो की दर से चावल की आपूर्ति की जाती थी। फिर आगे चलकर वामपंथी दलों के दबाव में आकर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना 2013 में लागू की गई। लेकिन मौजूदा केंद्र सरकार अब पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाले मुफ्त अनाज को बंद कर लाभार्थियों के खाते में सीधे डिजटल करेंसी भेजने का फैसला लिया है। यह फैसला गरीब और जन विरोधी है। यह योजना लागू होने के बाद अनाज गरीबों से दूर हो जाएगा। सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदना बंद कर देगी। इसके अलावे देश में लाखों पीडीएस दुकानदार बेरोजगार हो जायेंगे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी केंद्र सरकार के अनाज के बदले डिजिटल करेंसी देने के फैसले का कड़ा विरोध करती है और इस फैसले के खिलाफ आमलोगों से संघर्ष तेज करने का आह्वान किया है।
