बिहार सरकार धार्मिक उन्माद को अब जातीय युद्ध में बदलना चाहती है, बिहार को जाति युद्ध में झोंकना चाहती है। इसके लिए यादव को टारगेट किया जा रहा है। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी के आवास को अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाया जा रहा है। राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव दोनों पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में भी बड़े और भव्य बंगले के अधिकारी हैं।

जीतनराम मांझी और नीतीश कुमार दोनों पूर्व मुख्यमंत्री हैं। दोनों के नाम से बंगला आवंटित है, जबकि दोनों सांसद भी हैं। सरकार को यह बताना चाहिए कि इन दोनों को किस हैसियत से पटना में बंगला आवंटित है? यदि दोनों को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला आवंटित है तो लालू यादव को पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में बंगला क्यों नहीं मिलना चाहिए? अगर सरकार राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में नया बंगला आवंटित करती है तो भी लालू यादव पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत वाले बंगले के अधिकारी हैं ही। मंत्री संतोष सुमन और उनकी पत्नी व विधायक दीपा कुमारी को अलग-अलग बंगला आवंटित है तो लालू यादव और राबड़ी देवी को अलग-अलग दो बंगले क्यों आवंटित नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा उपेंद्र कुशवाहा, संजय झा और देवेश चंद्र ठाकुर के नाम भी पटना में सरकारी बंगला आवंटित हैं, जबकि तीनों सांसद हैं। सरकार को यह बताना चाहिए कि पटना में पांच सांसदों को किस नियमित के तहत बंगले आवंटित किये गये हैं या पांचों अवैध कब्जा करके सरकारी आवास में रह रहे हैं।

दरअसल भाजपा सरकार अब बिहार को जाति युद्ध में झोंकना चाहती है। धार्मिक उन्माद और मंदिर-मस्जिद का मुद्दा अप्रासंगिक होने लगा है तो अब जाति युद्ध की तैयारी की जा रही है। इसके लिए पिछड़ों की सबसे बड़ी आबादी वाली जाति यादव और दलितों में सबसे बड़ी आबादी वाली जाति चमार को आमने-सामने कर दिया गया है। राबड़ी देवी का आवास 10 सर्कुलर रोड एक चमार जाति के मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया गया है। प्रशासनिक रूप से यह आवास एक मंत्री को आवंटित किया है और राजनीतिक रूप से यह आवास एक चमार को आवंटित किया गया है। यह उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी कहते हैं। उन्होंने अपनी मीडिया बयान में कहा है कि नंदकिशोर राम दलित जाति से आते हैं, इसलिए राबड़ी देवी आवास नहीं खाली कर रही हैं।

विजय चौधरी खुद भूमिहार जाति से आते हैं। सामान्य स्थिति में वे उपमुख्यमंत्री के लिए कर्णांकित 5 देशरत्न मार्ग के अधिकारी थे। लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उस बंगले को मुख्यमंत्री आवास में समाहित कर लिया है। तब क्या भूमिहार उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी कहेेंगे कि कोईरी मुख्यमंत्री ने भूमिहार उपमुख्यमंत्री का बंगला हड़प लिया है? क्या विजय चौधरी उपमुख्यमंत्री के लिए पूर्व से निर्धारित उपमुख्यमंत्री के आवास में रहते हैं?

दरअसल आवास की यह लड़ाई 10 सर्कुलर रोड पर कब्जे का नहीं है। बल्कि यह बिहार को सरकारी स्तर पर जाति युद्ध में झोंकने की तैयारी है। अखबारों में प्रकाशित उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी का बयान बिहार को जाति युद्ध में झोंकने की सरकारी घोषणा है। दलित और पिछड़ों की इस लड़ाई का सीधा लाभ सवर्णों को मिलेगा। सवर्णों की साजिश से गैरसवर्णों को सचेत और सतर्क रहना चाहिए।
पत्रकार वीरेंद्र यादव
