राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने 10 सर्कुलर रोड आवास पर भाजपा और जदयू नेताओं द्वारा की जा रही अनर्गल बयानबाजी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जानना चाहा है कि 10 सर्कुलर रोड आवास हो या अन्य सरकारी बंगले क्या भाजपा और जदयू का मौरुसी अथवा जिराती सम्पत्ति है जो जब मन करे किसी को दे दें और जब मन करे किसी से छीन ले ? सत्ताधारी नेताओं द्वारा बार-बार नियम का हवाला दिया जाता है तो नियम भी पारदर्शी और समदर्शी होना चाहिए। नियम यदि पक्षपाती होगा तो उसका विरोध किया जाएगा। भाजपा और जदयू के नेता इस प्रकार बयान दे रहे हैं जैसे सरकारी आवास उनका मौरुसी और जिराती हो।
राजद प्रवक्ता ने कहा कि जब विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार जी को वही बंगला विधानसभा अध्यक्ष के आवास के रूप में कर्णांकित किया गया जिसमें वे पहले से यह रहे थे, इसी प्रकार विजय कुमार चौधरी जी को वही बंगला उपमुख्यमंत्री आवास के रूप में कर्णांकित कर दिया गया जिसमें पूर्व से वे रहते आ रहे हैं तो फिर राबड़ी देवी जी को 10 सर्कुलर रोड के बदले दूसरा आवास आवंटित करने का औचित्य क्या है। सवाल आवास का नहीं है बल्कि सरकार के नियत और उसके घटिया राजनीति का है।
जो भी सरकारी बंगले हैं वह जनता की गाढ़ी कमाई से बना है और उसे जनता के पैसे पर से हीं मेनटेन किया जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी अकेले हैं उन्हें 7 सर्कुलर रोड का आलिशान बंगला दे दिया गया। उनके पुत्र स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार अकेले हैं उन्हें 2 देशरत्न मार्ग का आलिशान बंगला देश दिया गया। सभी मंत्रियों को दो-दो आवास दिया गया है, एक मंत्री के नाम पर और एक विधान मंडल के सदस्य के रूप में। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा सत्ताधारी नेताओं के एशो-आराम पर खर्च किया जा रहा है।
