राजद प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने टेंडर घोटाले की जांच कर रही विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) पर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति करने और इस घोटाले से जुड़े आईएएस पदाधिकारीयों को बचाने का आरोप लगाया है। ज्ञातव्य है कि एसवीयू द्वारा न्यायालय में सात अभियुक्तों के खिलाफ 4000 पेज का चार्जशीट दाखिल किया गया। जिसमें निलंबित आईएएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा और योगेश सागर का नाम नहीं है।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि ईडी द्वारा मनी लांड्रिंग के सिलसिले में जून 2025 में जब विभिन्न स्थानों पर छापा मारा गया था, उसी दौरान टेंडर घोटाले का मामला सामने आया। हालांकि राजद काफी पहले से बिहार की एनडीए सरकार में हो रहे टेंडर घोटाले का मामला उठाते रहा है। ईडी के छापे के दौरान ही यह बातें साफ हो गई थी कि इस घोटाले में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संलिप्त हैं। जून 2025 में ईडी द्वारा भेजे गए परिवाद पत्र के आधार पर हीं बिहार की विशेष निगरानी इकाई द्वारा इस टेंडर घोटाले की एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई। प्रारंभिक जांच के आधार पर हीं दो आईएएस अधिकारी अभिलाषा शर्मा और योगेश सागर को निलंबित भी कर दिया गया था। पर कल जो चार्जशीट दाखिल किया गया है उसमें उन दोनों अधिकारियों का नाम नहीं है। सवाल है कि जब उन दोनों के खिलाफ कोई साक्ष्य था हीं नहीं तो फिर उन्हें निलंबित क्यों किया गया था।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि चूंकि हजारों करोड़ के इस टेंडर घोटाले से कई अति प्रभावशाली आईएएस अधिकारियों की संलिप्तता के लिंक जुड़े हुए हैं, इसलिए जांच के दायरे को काफी सीमित कर जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर दिया गया है। भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता जिस तारिणी दास के घर से छापामारी में ग्यारह करोड़ रुपए मिले थे, उन्हें रिटायरमेंट के बाद कैबिनेट की स्वीकृति के प्रत्याशा में दो महीने का सेवा विस्तार दिया जाना अपने आप में यह साबित करता है कि उनके उपर उच्चस्थ पदाधिकारी का वरदहस्त प्राप्त था। आखिर वो कौन लोग हैं जिनके कृपा से उन्हें सेवा विस्तार दिया गया था। एसवीयू के जांच में यह बात आनी चाहिए थी। पशुपालन घोटाले वाले मामले में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद जी पर यही आरोप लगा है कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र जी के अनुशंसा पर उन्होंने रिटायरमेंट के बाद पशुपालन विभाग के तत्कालीन निदेशक को सेवा विस्तार दिया था। और इसी आधार पर अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराया गया। टेंडर घोटाला तो पशुपालन घोटाले से सैंकड़ों गुणा ज्यादा है। और मामला भी उससे ज्यादा गंभीर है।
