साइबर अपराध, डिजिटल अरेस्ट एवं ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी से आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पटना जिला प्रशासन ने व्यापक एवं बहुस्तरीय कार्ययोजना तैयार की है। जिला में साइबर अपराध की रोकथाम के लिए किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी श्री कुन्दन कुमार ने अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के साथ-साथ जन-जागरूकता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि साइबर अपराध से नागरिकों की सुरक्षा प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बदलते डिजिटल परिवेश में अपराध के नए तौर-तरीकों के प्रति लोगों को जागरूक करना और घटना होने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना, दोनों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

1930—साइबर फ्रॉड की स्थिति में पहला कदम
जिलाधिकारी ने कहा कि 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर है। किसी भी प्रकार की साइबर या वित्तीय धोखाधड़ी होने पर पीड़ित को बिना समय गंवाए 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि 1930 नंबर को आम लोगों के दैनिक जीवन से जुड़े अधिक से अधिक माध्यमों पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
इसी क्रम में बिजली बिलों पर 1930 हेल्पलाइन नंबर स्पष्ट रूप से अंकित किया जाएगा। बिजली बिल भुगतान/रिचार्ज से संबंधित मोबाइल ऐप्स पर भी इसका प्रमुखता से प्रदर्शन सुनिश्चित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त ‘सुधा’ दूध एवं अन्य उत्पादों तथा सुधा पार्लर पर भी 1930 हेल्पलाइन नंबर के व्यापक प्रचार-प्रसार की कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम के डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड बनेंगे साइबर जागरूकता का माध्यम
नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शहर में लगे डिजिटल डिस्प्ले, एलईडी स्क्रीन एवं भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थलों पर साइबर अपराध से बचाव संबंधी संदेशों के साथ 1930 हेल्पलाइन नंबर का नियमित प्रचार किया जाए।
इसका उद्देश्य नागरिकों को यह संदेश देना है कि सतर्क रहें, ठगी से बचें और घटना होते ही तुरंत 1930 पर शिकायत करें।

स्कूल-कॉलेजों में ‘साइबर मंगलवार’
साइबर जागरूकता को जन-अभियान का स्वरूप देने के लिए जिले के स्कूलों, कॉलेजों एवं शैक्षणिक संस्थानों में ‘साइबर मंगलवार’ के तहत विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विद्यार्थियों एवं युवाओं को डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, OTP फ्रॉड, संदिग्ध लिंक, बैंकिंग फ्रॉड एवं सोशल मीडिया से जुड़े साइबर अपराधों के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहने के साथ अपने परिवार एवं समाज को भी जागरूक कर सकें।
संगठित साइबर अपराधियों और म्यूल खातों पर कसेगा शिकंजा
जिलाधिकारी ने संगठित साइबर अपराधियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई तेज करने तथा साइबर अपराध में इस्तेमाल हो रहे म्यूल खातों का सत्यापन कर दोषियों को चिन्हित करने का निर्देश दिया।
साइबर पीड़ितों की धनराशि की रिकवरी के लिए साइबर सेल एवं बैंकों के बीच त्वरित समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करने को कहा गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि साइबर फ्रॉड के मामलों में समयबद्ध कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है
संबंधित पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि एक लाख रुपये से अधिक की साइबर/वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में e-Zero FIR दर्ज करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए तथा उसे नियमित FIR में तत्काल परिवर्तित करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिला स्तरीय बैकिंग कमिटी की बैठक में अब साइबर फ्रॉड भी प्रमुख एजेंडा
जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिला स्तरीय बैंकिंग समिति (DLBC) की बैठकों में साइबर अपराध एवं वित्तीय फ्रॉड को प्रमुख एजेंडा बनाया जाए। म्यूल खातों को फ्रीज करने, संदिग्ध लेन-देन पर कार्रवाई तथा पीड़ितों की धनराशि वापस कराने की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी।
फर्जी सिम बेचने वाले एजेंट एवं गिरोह रडार पर
सभी थाना अध्यक्षों एवं पुलिस उपाधीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम उपलब्ध कराने वाले एजेंटों एवं संगठित गिरोहों की पहचान कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, PIN, CVV, पासवर्ड अथवा बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें, संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें तथा फोन या वीडियो कॉल पर पुलिस, CBI, ED अथवा किसी सरकारी एजेंसी के नाम पर डराने-धमकाने वालों के झांसे में न आएं।
ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल सतर्कता बरतें और घटना की सूचना तुरंत 1930 पर दें एवं शिकायत दर्ज कराएं।
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि प्रभावी पुलिस कार्रवाई, बैंकिंग संस्थानों के साथ समन्वय और निरंतर जन-जागरूकता के माध्यम से पटना को साइबर अपराध के प्रति अधिक सुरक्षित एवं जागरूक जिला बनाया जाए।
