भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने स्टेट हाइवे, बाईपासों और बड़े पुलों पर टोल टैक्स वसूलने के राज्य सरकार के फैसले की निंदा की है। बिहार सरकार का खजाना खाली है, सरकार अपना खजाना भरने के लिए राज्य की जनता पर तरह-तरह का टैक्स लाद रही है। पहले शहरों में होल्डिंग टैक्स बढ़ाई गई। अब ग्रमीण इलाकों में भी घर घर से टैक्स वसूलने की तैयारी है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी स्टेट हाइवे और राज्य के बड़े पुलों पर टोल टैक्स वसूलने के फैसले को वापस लेने की मांग करती है।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि बिहार में भाजपा की सरकार बनते ही पहले राज्य के किसानों से दो लाख एकड़ जमीन छीन कर बड़े पूंजीपतियों को देने का निर्णय लिया गया। अब सरकार राज्य की सभी सड़कें भी ठेकेदारों और पूंजीपतियों के हवाले कर रही है। सड़कंे और पुलों का निर्माण राज्य की जनता के गाढ़ी कमाई से कराया गया है। अब सम्राट चैधरी की सरकार टैक्स वसूलने के लिए सड़कें पूंजीपतियों के हवाले कर रही है। राज्य सरकार ने राज्य सरकार की सड़कों, बड़े पुलों और बाईपास पर टोल वसूलने के लिए पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली 2026 को मंजूरी दी है।
नई नियमावली के तहत कार, जीप या वैन जैसे हल्के वाहनों के लिए 1.25 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टैक्स तय की गई है। अधिकांश स्टेट हाइवे ग्रामीण इलाकों से होकर गुजरती है। इन सड़कों पर रोजमर्रा के कार्य से लोग आते जाते हैं। टोल टैक्स को लेकर नई नीति लागू होने से आमलोगों को कठिनाई होगी और बस भाड़े व अन्य यातायात के साधन के भाड़े बढ़ेंगे जिसका असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। राज्य सरकार तत्काल प्रभाव से स्टेट हाइवे, बड़े पुलों ओवर बाईपास टोल टैक्स वसूलने का फैसला वापस लें।
