अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण विकास दिवस–2026 के अवसर पर दीपक प्रकाश, माननीय मंत्री, पंचायती राज विभाग, बिहार सरकार ने राज्य के समस्त ग्रामीण परिवारों, किसान भाइयों एवं बहनों, जीविका दीदियों, पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, युवाओं तथा विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं ।
माननीय मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा प्रत्येक वर्ष 6 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण विकास दिवस के रूप में मनाया जाना इस बात का प्रतीक है कि ग्रामीण क्षेत्र किसी भी राज्य एवं राष्ट्र के समग्र विकास की आधारभूत इकाई हैं। गांव खाद्य सुरक्षा, आजीविका, सामाजिक स्थिरता, सामुदायिक सहयोग और सतत विकास की प्रथम कड़ी है। ग्रामीण समाज ही वह आधार है, जहां उत्पादन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है, श्रम की शक्ति विकसित होती है और आत्मनिर्भर समाज की मजबूत नींव तैयार होती है।
बिहार की 85 फीसदी से अधिक आबादी ग्रामीण क्षेत्र में निवास करती है। दीपक प्रकाश ने कहा कि बिहार सरकार माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में गांवों को सुशासन, विकास, पारदर्शिता और जनभागीदारी का सशक्त केंद्र बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने की घोषणा ग्रामीण छात्र-छात्राओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय है। इससे विद्यार्थियों को अपने घर के समीप उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा होगी, स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक वातावरण सशक्त होगा तथा उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों की ओर होने वाले पलायन में कमी आएगी।

माननीय मंत्री ने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, प्रभावी एवं उत्तरदायी बनाने की दिशा में भी राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने सरकारी चिकित्सकों को यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि सामान्य मामलों में मरीजों को अनावश्यक रूप से बड़े अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति रोकी जाए तथा जिला, अनुमंडल एवं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इससे ग्रामीण क्षेत्र के नागरिकों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर उपचार उपलब्ध होगा, बड़े अस्पतालों पर अनावश्यक दबाव कम होगा तथा सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आमजन का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा। गंभीर एवं जटिल मामलों में आवश्यक रेफरल की व्यवस्था बनी रहेगी, किंतु सामान्य रोगों के उपचार को स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराना ग्रामीण स्वास्थ्य सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि बिहार की जीविका पहल ने ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण को नई पहचान दी है। जीविका दीदियों ने यह सिद्ध किया है कि जब ग्रामीण महिलाएं संगठित होकर आगे बढ़ती हैं, तो परिवार, समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था—तीनों स्तरों पर सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। जीविका का कार्य आज ग्रामीण सशक्तिकरण के प्रभावी मॉडल के रूप में देश ही नहीं, वैश्विक पटल पर भी चर्चा का विषय है।

माननीय मंत्री ने कहा कि पंचायती राज विभाग, बिहार ग्रामीण आबादी को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। पंचायत सरकार भवनों का निर्माण ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक सेवाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना के तहत ग्राम पंचायतों में प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस योजना के सतत अनुश्रवण के लिए ब्रेडा के माध्यम से केंद्रीकृत अनुश्रवण प्रणाली विकसित की गई है। जिला समाहरणालयों में सार्वजनिक आवागमन वाले स्थानों पर एलईडी टीवी के माध्यम से ग्राम पंचायतों में अधिष्ठापित सोलर स्ट्रीट लाइट्स की रियल टाइम अपडेट उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही जनप्रतिनिधियों को अनुश्रवण प्रणाली का लिंक उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे अपने क्षेत्र में लगाई गई सोलर स्ट्रीट लाइट्स की स्थिति का अपने स्तर से भी अनुश्रवण कर सकें। अक्रियाशील अथवा खराब सोलर स्ट्रीट लाइट्स के संबंध में शिकायत दर्ज कराने के लिए MGSSLY_CMS मोबाइल एप्लीकेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। ये सभी व्यवस्थाएं योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य की ग्राम कचहरियां ग्राम पंचायतों में शांति, सद्भावना और स्थानीय न्याय व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वैकल्पिक न्याय प्रणाली के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में पंचायत ई-ग्राम कचहरी पोर्टल ने ग्राम कचहरियों के प्रति आमजन का विश्वास बढ़ाया है। सुनवाई की तिथि एवं अंतिम निर्णय की प्रति उपलब्ध कराने की व्यवस्था से ग्रामीण न्याय प्रणाली अधिक सरल, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनी है।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार राज्य की ग्राम पंचायतें पारदर्शी एवं प्रभावी रूप से योजना का निर्माण स्वयं को सुदृढ़ कर रही हैं तथा स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों के द्वारा सतत विकास लक्ष्य -2030 प्राप्त करने की भूमिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। केंद्र तथा राज्य वित्त आयोग द्वारा सम्पोषित योजनाओं से राज्य की ग्राम पंचायतों में तेजी से विकास सुनिश्चित हो रहा है। त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों एवं कर्मियों के क्षमता संवर्धन हेतु भी विभाग प्रतिबद्ध है।
दीपक प्रकाश ने कहा कि “सबका सम्मान—जीवन आसान” के तहत ग्राम पंचायतों में अवस्थित मोक्षधाम/कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार होने पर मृतक के परिजन को 24 घंटे के भीतर मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का निर्णय प्रशासनिक संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसी प्रकार ग्राम पंचायतों में संचालित आरटीपीएस केंद्रों पर 64 प्रकार की लोक सेवाओं की उपलब्धता से ग्रामीण नागरिकों को प्रखंड एवं जिला मुख्यालयों का अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिली है।
माननीय मंत्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी द्वारा प्रारंभ किया गया सहयोग पोर्टल एवं सहयोग शिविर आमजन की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान की महत्वपूर्ण जनोन्मुखी पहल है। यह व्यवस्था सरकार को नागरिकों के और निकट लाती है तथा प्रशासनिक उत्तरदायित्व को और अधिक सुदृढ़ करती है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को आयोजित पंचायत विकास दिवस ग्राम सभा को सक्रिय करने तथा स्थानीय नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रभावी माध्यम है। इस आयोजन के माध्यम से ग्रामीण नागरिक अपनी आकांक्षाएं, समस्याएं और प्राथमिकताएं स्वयं रख पाते हैं। स्थानीय लोगों की सहभागिता से योजनाएं अधिक व्यवहारिक, उपयोगी और जनकेंद्रित बनती हैं। ग्राम सभा की सक्रियता से स्थानीय समस्याओं के समाधान तथा जमीनी स्तर पर विकास को नई गति मिलती है।
अंतरराष्ट्रीय ग्रामीण विकास दिवस के अवसर पर माननीय मंत्री ने कहा कि सशक्त ग्राम पंचायतें ही सशक्त बिहार की आधारशिला हैं। जनभागीदारी, पारदर्शिता, तकनीकी हस्तक्षेप और सुशासन के माध्यम से बिहार के गांव विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ग्राम पंचायतों को विकास, सेवा, न्याय, पारदर्शिता और जनविश्वास का सशक्त केंद्र बनाकर विकसित भारत और समृद्ध बिहार के लक्ष्य को साकार किया जाएगा।
