पत्रकारों को रेलवे में 50% रियायत संबंधी मामला आज बिहार विधान परिषद में गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उठाया गया। राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य अशोक कुमार पांडे ने इस मामले को उठाते हुए कहा है पत्रकारों को पिछले 45 साल पहले जो सुविधा शुरू की गई थी वह आज बंद है ,जबकि 2009-10 के रेल बजट में पत्रकारों को रेल मंत्री ममता बनर्जी ने फोटो पहचान सह क्रेडिट कार्ड के रूप में पत्रकारों को मूल किराए में मिलने वाली छूट को बढ़ाकर 50% कर दिया था ,उसके बाद 2016-17 के रेलवे बजट में घोषणा के बाद भारतीय रेलवे और आईआरसीटीसी ने पत्रकारों के रियायती पास पर ई टिकट बुक करने की सुविधा भी प्रदान कर दी ।
लेकिन दुर्भाग्यवश कोविड-19 महामारी के दौरान मार्च 2020 में इस छूट को केंद्र सरकार के द्वारा बंद कर दिया गया जो आज तक यथावत है। ऐसी सूरत में पत्रकारों को होने वाली परेशानी को देखते हुए इस सुविधा को दोबारा चालू करने की जरूरत है इस मामले पर सरकार के तरफ से उत्तर देते हुए परिवहन मंत्री दामोदर रावत ने कहा कि हम माननीय सदस्य के इस डिमांड को स्वीकार करते हुए इस सुविधा को बहाल करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकार के तरफ से अनुशंसा भेजने का काम करेंगे।
गौरतलब है की प्रेस मेंस वेलफेयर एसोसिएशन के द्वारा इस मामले को पिछले कई वर्षों से लगातार उठाया जाता रहा है और कई बार राज्य सरकार और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि को इस मामले को संज्ञान में लाया जाता रहा है ,पिछले सत्र में भी बिहार विधानसभा अध्यक्ष, बिहार विधान परिषद के सभापति सहित सरकार के कई मंत्री और कई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि को इस मामले को सदन में उठाने के लिए मांग पत्र भी सौंपा गया और सबने सहमति भी जताई, जिसके फलस्वरुप आज इस मामले को न केवल सदन में गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उठाया गया बल्कि सरकार के द्वारा अनुशंसा कर केंद्र सरकार को भेजने पर भी सहमति जताई गई । है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय कुमार मिश्रा ,सचिव दया शंकर तिवारी और संगठन सचिव बाल कृष्ण वरिष्ठ पत्रकार भोलानाथ ने संयुक्त रूप से संतोष व्यक्त करते हुए कहा इस दिशा में आज उनकी यह पहली जीत है और हमलोग तब तक इस लड़ाई को जारी रखेंगे जब तक की पत्रकार के हितों की रक्षा के लिए रेल विभाग रियायत संबंधी आदेश पत्र निर्गत नहीं कर देती है ।
