सरकार के सात निश्चय-3 के तहत् समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार की परिकल्पना अंतर्गत राज्य में बंद चीनी मिलों को पुनः परिचालित करने के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार बड़े कदम उठा रही है। इसके तहत मधुबनी के सकरी में पूर्व से बंद पड़े चीनी मिल की भूमि पर नये सहकारी चीनी मिल तथा दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराया जाना है। इन्हें इंडिया पोटाश लिमिटेड के माध्यम से स्थापित एवं संचालित किया जाएगा। चीनी मिल के साथ वहां पर पावर जनरेशन प्लांट, डिस्टलरी और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र की भी स्थापना की जाएगी। ये बातें सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को सूचना भवन के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं।
उन्होंने कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों को शामिल करके सहकारी चीनी मिल समिति का गठन किया जा रहा है। एक पारदर्शी व्यवस्था के तहत पोर्टल तैयार करके किसानों को आमंत्रित किया गया है। अभी तक इसके लिए 10,000 से 15,000 किसानों ने आवेदन किए हैं। सहकारिता विभाग की कोशिश ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है, इसके लिए तेजी से काम किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में सहकारिता आंदोलन को सुदृढ़, आधुनिक और नवाचार आधारित बनाने के लिए बिहार राज्य सहकारिता नीति, 2026 लागू की गई है। नई सहकारिता नीति से रोजगार के बेहतर अवसर विकसित होंगे। पारंपरिक सहकारी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार, पारदर्शी प्रशासन और कुशल प्रबंधन प्रणाली से सशक्त किया जा रहा है। इस नीति के बाद अब गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी नई सहकारी समितियों के गठन एवं विस्तार को प्रोत्साहित किया जाएगा।

सुधा की तर्ज पर खुलेंगे तरकारी बूथ
प्रेस वार्ता में सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि सहकारिता नीति के माध्यम से युवाओं, महिलाओं, किसानों, उद्यमियों और वंचित समुदायों को सहकारिता आंदोलन से जोड़कर आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और सामूहिक समृद्धि को बढ़ावा दिया जाएगा।
विभाग सब्जी के कलेक्शन सेंटर में बेहतर आधारभूत संरचना विकसित करेगा। 350 पंचायतों में सब्जी संग्रहण केंद्र और 50 प्रखंडों में आधारभूत संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
हर थाली में बिहार की तरकारी हो, इसके लिए भी हम लगातार काम कर रहे हैं।
रबी से फसल बीमा का मिलेगा लाभ

खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में 36.85 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध 6902 समितियों के माध्यम से 5.40 लाख किसानों से 36.79 लाख मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई। अधिप्राप्त धान के विरुद्ध राज्य खाद्य निगम को 24.57 लाख मीट्रिक टन यानी 98.47 प्रतिशत चावल की आपूर्ति की जा चुकी है।
राज्य की सहकारी समितियों में 7,452 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है। इससे 18.827 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता का सृजन हुआ है।
बैंकिंग सेवाओं का हो रहा विस्तार
सहकारिता में सहकार के तहत 186 दुग्ध सहकारी समितियों, 618 पैक्स, 19 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों और सात अन्य सहकारी समितियों को बैंक मित्र के रूप में विकसित कर माइक्रो-एटीएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार किया गया है। 16 अगस्त 2026 से एक माह तक विशेष अभियान चलाकर दुग्ध सहकारी समितियों, पैक्स, पीवीसीएस, अन्य सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के खाते खोले जाएँगे।
पैक्सों में बढ़ा कारोबार
पैक्सों में व्यावसायिक विविधीकरण के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 300 प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगभग 6425 पैक्सों में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इनमें 5807 समितियां क्रियाशील हैं और पैक्सों द्वारा अब तक 8.81 करोड़ रुपये से अधिक का व्यवसाय किया जा चुका है।
जन औषधि केंद्र योजना के तहत चयनित 461 पैक्सों में से 373 में केंद्र स्थापना की स्वीकृति दी गई है। इनमें 37 पैक्सों को औषधि अनुज्ञप्ति, 36 को स्टोर कोड मिल चुका है और 36 पैक्सों में संचालन शुरू हो गया है।
विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत 36 समितियों में 1000, 2000 और 2500 मीट्रिक टन क्षमता के गोदामों का निर्माण कराया जा रहा है।
100 एफपीओ गठित
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों की 100 चयनित पंचायतों में 100 किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) का गठन किया गया है। इनका उद्देश्य किसानों को बाजार से जोड़कर उनकी उपज का उचित मूल्य और कृषि इनपुट उपलब्ध कराना है। वर्तमान में 50 एफपीओ ने व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं।
इस प्रेस वार्ता में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निबंधक, सहयोग समितियां श्री रजनीश कुमार सिंह, अपर सचिव, अभय कुमार सिंह, प्रबंध निदेशक, वेजफेड मनोज कुमार सिंह सहित विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
