भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्नाराज फूफाश् वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रधानमंत्री अपनी नाकामी का रोना रो रहे हैं। प्रधानमंत्री गुजरात में एक कार्यक्रम के दौरान केन्द्र में अपनी सरकार की 12 वर्षों के कामो को गिना रहे थे। लेकिन देश की जनता कारपोरेट लूट, अपराध, महंगाई और भ्रष्टाचार से त्रस्त है। युवा बेरोजगार हैं। बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही। छात्र निराश है। इस पर प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोले।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि देश के युवा आज प्रधानमंत्री से 12 वर्षों का हिसाब मांग रहे हैं। देश में गहराते बेरोजगारी संकट के संदर्भ में, नवीनतम आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस 2025) के अनुसार 18 से 29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी की दर 14.8 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो उच्च शिक्षा प्राप्त (डिप्लोमा, स्नातक अथवा परास्नातक) युवाओं में बढ़कर 29.4 प्रतिशत के चिंताजनक स्तर तक पहुंच जाती है। वास्तविक स्थिति केवल बेरोजगारी दर के आंकड़ों से कहीं अधिक भयावह है। मानक परिभाषा के अनुसार बेरोजगारी केवल उन्हीं व्यक्तियों की गिनती करती है जो वर्तमान में कार्यरत नहीं हैं किंतु सक्रिय रूप से रोजगार की तलाश में हैं। इस गणना से वे लोग बाहर छूट जाते हैं जो हताश होकर श्रम बल से बाहर हो चुके हैं और काम ढूंढना बंद कर चुके हैं जिनमें एक बहुत बड़ी संख्या युवा महिलाओं की है। प्रधानमंत्री परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी, केन्द्रीय सेवाओं में रिक्तियाँ और बंद पड़ी भत्र्ती जैसे मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विपक्ष को ही नाराज बता रहे हैं, विपक्ष को कोस रहें है और नित्य नये-नये जुमले गढ़ रहे है। लगता है प्रधानमंत्री छात्र-युवा व आम लोगों में व्याप्त आक्रोश से घबरा गये है। अब देश की जनता बदलाव चाहती है।
