महागठबंधन द्वारा जारी ‘तेजस्वी प्रण’ पर एनडीए नेताओं की प्रतिक्रिया को उनके मानसिक दिवालियापन का नमूना बताते हुए कहा है कि बिहार के लिए उनके पास न कोई विजन है न कोई मिशन। उनके नकारात्मक राजनीति को बिहार की जनता अब भली-भांति समझ चुकी है और उनके झांसे में नहीं आने वाली है। पिछले 20 वर्षों से एनडीए नेताओं द्वारा की जा रही नकारात्मक राजनीति ने बिहार को बर्बाद कर दिया है और बिहार को केवल मजदूर आपूर्ति करने वाला प्रदेश बना कर रख दिया है।
दूसरी ओर तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने अपने विजन और मिशन को ‘तेजस्वी प्रण’ के रूप में सार्वजनिक किया है। यह संकल्प पत्र दलों और दिलों का प्रण है। एक-एक घोषणा दिल से लिया हुआ प्रण है ।अपने हर प्रण को प्राण झोंक कर भी पूरा करने का दृढ़ संकल्प है । काफी वर्क-आउट के बाद ये घोषणाएं की गई है। सबका ब्लूप्रिंट तैयार है। पर जिनके दिल और दिमाग में नकारात्मक सोच है उन्हें यह समझ में आएगा भी नहीं। इसे समझने के लिए उन्हें पहले अपना दिल और दिमाग साफ करना होगा।

इंडिया गठबंधन की ओर से भावी मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने जनहित में जो घोषणाएं की हैं, वह आम जनजीवन से इतना जुड़ा हुआ है कि अब सबके जुबान पर हीं नहीं बल्कि दिल में उतर चुका है। हर घर एक सरकारी नौकरी, पुरानी पेंशन स्कीम, संविदा राज की पूर्ण समाप्ति, संविदाकर्मियों को स्थाई नौकरी, हर अनुमंडल में एक महिला डिग्री कॉलेज, बचे हुए प्रखंडों में एक डिग्री कॉलेज, वित्त रहित कॉलेजों का कायाकल्प कर उनके शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मियों को वेतन, जीविका की कम्यूनिटी मॉबलाइजर को 30 हज़ार की सरकारी नौकरी और जीविका से जुड़ी हुई दीदियों के जीवन में ख़ुशहाली, दो वर्षों तक ब्याज मुक्त ऋण, लोहार, कुम्हार, बढ़ई, नाई, मोची भाइयों-बहनों-माताओं के स्वाबलंबन व स्वरोज़गार हेतु 5 साल के लिए एकमुश्त 5 लाख की ब्याज मुक्त सहायता राशि, बिना पेपर लीक के ससमय परीक्षा, विश्वविद्यालय के सत्रों का नियमितीकरण, प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए नि:शुल्क फ़ॉर्म, प्रदर्शनकारियों पर सामान्यतः “नो लाठीचार्ज”, आदि ऐसे वायदे हैं जो बिहार के नवनिर्माण में मिल का पत्थर साबित होने वाला है।
इन घोषणाओं पर सवाल खड़ा करने वाले वे ही लोग हैं जो कभी तेजस्वी जी द्वारा दस लाख नौकरी देने के वादे पर कभी सवाल खड़ा कर रहे थे और अब एक करोड़ नौकरी और रोजगार देने की बात करने लगे हैं।
