अष्टादश बिहार विधान सभा के द्वितीय सत्र में श्री रजनीश कुमार, स०वि०स० द्वारा सदन में पूछे गये तारांकित प्रश्न संख्या-437 पर आज दिनांक-17/02/2026 को 02.30 पूर्वाह्न में माननीय अध्यक्ष डॉ० प्रेम कुमार की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई।
इस बैठक में निम्न बिंदुओं पर विचार–विमर्श हुआ :
1. राज्य में घोड़परास के आखेट हेतु अनुज्ञप्तिधारी शूटरों की कुल संख्या, आखेट हेतु आवेदन की प्रक्रिया, आखेटकों को दी जाने वाली भुगतान राशि, भुगतान की प्रक्रिया एवं इसका प्रचार-प्रसार।
2. घोड़परास द्वारा फसल नष्ट किए जाने पर किसानों को दी जाने वाली अनुदान/सहायता राशि हेतु आवेदन की प्रक्रिया, संबंधित विभाग द्वारा क्षति आकलन की प्रक्रिया, भुगतान की राशि एवं प्रक्रिया एवं संबंधित योजना का प्रचार-प्रसार।
3. सांप (सर्प) को स्पष्ट रूप से जंगली/वन्य जीव घोषित करते हुए सर्पदंश से हुई मृत्यु/क्षति को वन्य प्राणी से हुई क्षति के समान मुआवजा भुगतान।
समीक्षा के दौरान पाया गया कि राज्य में घोड़परास के आखेट हेतु अनुज्ञप्तिधारी शूटरों की कुल संख्या मात्र 13 है। माननीय अध्यक्ष ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आखेटकों की संख्या बढ़ाकर 200–400 की जाए। साथ ही, आखेट हेतु आवेदन की प्रक्रिया सरल की जाए। उन्होंने इस योजना के व्यापक प्रचार–प्रसार हेतु निर्देश दिया। गेहूं की फसल कटने के उपरांत एवं वर्षा ऋतु से पहले आखेटकों की संख्या बढ़ाकर इसका व्यापक प्रचार–प्रसार किया जाए।
समीक्षा के क्रम में पाया गया कि घोड़परास द्वारा फसल नष्ट होने पर किसानों को अब तक कोई भी अनुदान/सहायता राशि/मुआवजा उपलब्ध नहीं हो पाई है। अध्यक्ष महोदय ने इस पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि क्षति आकलन की प्रक्रिया एवं आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि सरकार द्वारा बनाई गई योजना का लाभ किसानों को मिल सके। चूंकि कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी पंचायत स्तर तक कार्यरत होते हैं जबकि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारी/कर्मचारी प्रमुखत: जिले में कार्यरत होते हैं । इसलिए माननीय अध्यक्ष ने योजना के बेहतर क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए कृषि विभाग को निर्देश दिया।
इस बैठक में सांप (सर्प) को स्पष्ट रूप से जंगली/वन्य जीव घोषित करते हुए सर्पदंश से हुई मृत्यु/क्षति को वन्य प्राणी से हुई क्षति के समान मुआवजा भुगतान पर विस्तृत समीक्षा हुई। तत्कालीन माननीय उप मुख्यमंत्री दिवंगत सुशील कुमार मोदी ने सदन में सांप को वन्यजीव घोषित करने का आश्वासन दिया था। समीक्षा के क्रम में पाया गया कि सर्प दंश से हुई मृत्यु/क्षति पर वर्तमान में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 4 लाख रुपया मुआवजा का प्रावधान है जबकि वन्यजीव से हुई मृत्यु/क्षति पर 10 लाख रुपया मुआवजा का प्रावधान है। माननीय अध्यक्ष महोदय ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि सांप को वन्यजीव घोषित कर सर्प दंश से हुई मृत्यु/क्षति पर वन्यजीव से हुई मृत्यु/क्षति के समान 10 लाख रुपया मुआवजा देने संबंधी आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें।
इस बैठक में माननीय सदस्य श्री रजनीश कुमार, श्री जिवेश मिश्रा एवं श्री मिथिलेश तिवारी तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री आनंद किशोर, प्रधान उच्च वन संरक्षक श्री प्रभात कुमार गुप्ता, कृषि विभाग के प्रधान सचिव एवं पंचायती राज विभाग के सचिव श्री मनोज कुमार सहित प्रभारी सचिव श्रीमती ख्याति सिंह एवं सभा सचिवालय के वरीय पदाधिकारी शामिल हुए।
