कृषि मंत्री राम कृपाल यादव द्वारा आज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त जारी किये जाने के अवसर पर कृषि भवन, पटना के सभागार में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
माननीय कृषि मंत्री ने बताया कि इस अवसर पर देश के माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा दिसंबर 2025 से मार्च 2026 की अवधि के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 22वीं किस्त की राशि असम के गुवाहाटी में ज्योति-विष्णु अंतर्राष्ट्रीय कला केन्द्र, खानापारा से देश के 9.32 करोड़ से अधिक किसानों को लगभग 18,650 करोड़ रूपये की राशि हस्तांतरित की गई।
माननीय मंत्री ने कहा कि 22वीं किस्त के माध्यम से बिहार के 73.34 लाख से अधिक किसानों को 1467 करोड़ से अधिक की राशि प्राप्त होगी। इस योजना अंतर्गत अबतक बिहार के कुल 86.36 लाख से अधिक लाभुकों को कुल 30,092.80 करोड़ रूपये राशि 21 किस्तों में भारत सरकार द्वारा दी गयी।
माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक केन्द्रीय क्षेत्रक योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के सभी पात्र रैय्यत किसान परिवारों को आय में सहायता प्रदान करना है। इस योजना का मूल लक्ष्य फसलों के स्वास्थ्य एवं उचित उपज के लिए किसानों को विभिन्न उपादान क्रय करने हेतु वित्तीय मदद करना है ताकि किसानों के प्रत्याशित कृषि आय को सुनिश्चित किया जा सके। इस योजना का कार्यान्वयन 01.12.2018 से किया जा रहा है तथा इसका लाभ रैय्यत किसान परिवार को दिया जाना है, जिनके पास खेती योग्य भूमि है। यहाँ किसान परिवार से तात्पर्य पति, पत्नी एवं नाबालिग बच्चें से है, यानि परिवार का कर्त्ता/मुखिया ही पात्र होगें।
उन्होंने कहा कि इस योजना पर खर्च होने वाली राशि का शत-प्रतिशत वहन केन्द्र सरकार द्वारा किया जाता है। इस योजना के अन्तर्गत रैय्यत किसान परिवार को सहायता राशि के रूप में 6,000 रूपये प्रतिवर्ष प्रत्येक चार माह के अन्तराल (अप्रैल से जुलाई, अगस्त से नवम्बर एवं दिसम्बर से मार्च) पर किसानों के आधार एवं एन॰पी॰सी॰आई॰ से लिंक बैंक खाते में डी0बी0टी0 के माध्यम से दिया जाता है।

माननीय कृषि मंत्री ने कहा कि चौथा कृषि रोड मैप के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में कृषि क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। उन्होंने बताया कि बिहार का प्रसिद्ध मखाना अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच रहा है, वहीं राज्य के कई कृषि उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी वैश्विक पहचान मजबूत हुई है। मंत्री ने कहा कि राज्य का अन्नदाता अब ऊर्जादाता भी बन रहा है, क्योंकि किसान जैविक संसाधनों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं और बायो-इथेनॉल के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
