गोपालगंज जिले में स्थित सासामूसा चीनी मिल के 14 हजार गन्ना किसानों को उनके बकाये गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके बाद वर्षों से बंद पड़े इस चीनी मिल के चालू होने का रास्ता साफ हो गया है।

विदित हो कि सासामूसा चीनी मिल के बंद हो जाने से वहां के करीब 14 हजार किसानों की गन्ना मूल्य का लगभग 43 करोड़ रूपये मिल के पास बकाया था। इसको लेकर वहां के किसान लगातार मिल को चालू कराने के साथ ही बकाये राशि का भुगतान कराने के लिए आंदोलन कर रहे थे। वहीं राज्य सरकार बिहार के बंद सभी मिलों को पुन: चालू कराने के साथ ही 25 नई मिलें स्थापित कराने की दिशा में कार्य कर रही है।
बताया जाता है कि राज्य सरकार ने सासामूसा मिल को चालू कराने के लिए सबसे पहले किसानों के बकाया राशि का भुगतान कराने के लिए गत दिनों मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में इसकी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके बाद इस मिल को चालू होने का रास्ता साफ हो गया है। लंबे समय से अपने बकाये का इंतजार कर रहे किसानों को अब उनके ईख मूल्य का एकमुश्त भुगतान किया जाएगा। इससे किसानों की आमदनी में इजाफा होगा और वे फिर से गन्ने की खेती की ओर लौटेंगे। गन्ने की खेती दोबारा शुरू होने से चीनी मिल के फिर से चालू होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। सरकार के इस ऐतिहासिक कदम से न केवल किसानों को उनका हक मिलेगा, बल्कि बंद पड़ी मिल के दोबारा शुरू होने और सूबे में 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का रास्ता भी साफ हो गया है।

कोट-
“हमारी सरकार किसानों के हित और उनके कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सासामूसा चीनी मिल के किसानों का बकाया भुगतान हमारी प्राथमिकता सूची में था। कैबिनेट से मिली इस मंजूरी के बाद जल्द ही 14 हजार किसानों के खातों में उनके हक का पैसा जाएगा। इससे न सिर्फ हमारे गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि मिल चालू होने से गोपालगंज और आसपास के इलाकों में रोजगार और समृद्धि के नए द्वार खुलेंगे।”
