जद (यू) विधान पार्षद सह मुख्य प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार एवं प्रदेश प्रवक्ता श्री मनीष यादव ने संयुक्त रुप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर झूठ की राजनीति बंद करने की सलाह दी।
तेजस्वी यादव के ट्वीट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष ने उस ट्वीट के आधार पर झूठ फैलाना का काम किया। तेजस्वी यादव ने उस ट्वीट में लिखा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान एकमात्र वीवीआईपी शौचालय के निर्माण के लिए 7 लाख 41 हजार रुपए खर्च किए गए। जबकि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक- 4 प्राक्क 01-104/2024-282, दिनांक 02.06.2026 में ये साफ-साफ लिखा है कि उस दौरान अलग-अलग जगहों पर एक नहीं बल्कि चार शौचालयों का निर्माण कराया गया । जिसकी कुल लागत 4 लाख 71 हजार 691 रुपए थी। मतलब एक वीवीआईपी शौचालय के निर्माण पर महज 1 लाख 17 हजार 922 रुपए ही खर्च हुए।

सच्चाई क्या है?
| आरोप | सच्चाई |
| एक अस्थायी VVIP टॉयलेट का निर्माण कराया गया । | लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, बिहार सरकार के पत्रांक- 4 प्राक्क 01-104/2024-282, दिनांक 02.06.2026 के अनुसार—1 शौचालय नहीं 4 शौचालय का निर्माण कराया गया । |
| एक अस्थायी VVIP टॉयलेट पर ₹7 लाख 41 हजार रूपये खर्च हुए। | 4 VIP शौचालयों पर कुल ₹ 4 लाख 71 हजार 691 रूपयेव्यय हुआ।
प्रति शौचालय लागत लगभग ₹ 1 लाख 17 हजार 922 |
वहीं सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए आकस्मिक निधि से 3 हजार 662 करोड़ रुपए की निकासी को दिवालियापन बताने वाले बयान पर पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि आकस्मिक निधि का उपयोग आर्थिक दिवालियापन नहीं होता। किसी राज्य के दिवालिया होने का आकलन उसके ऋण भुगतान में चूक, कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के दीर्घकालिक अवरोध, बाजार से उधार लेने की क्षमता समाप्त होने अथवा संवैधानिक वित्तीय हस्तक्षेप जैसी परिस्थितियों से किया जाता है।
बिहार में ऐसी कोई स्थिति वर्तमान में नहीं है। बिहार सरकार का ऋण-जीएसडीप (Debt-GSDP) अनुपात हाल के वर्षों में लगभग 33 से 40 प्रतिशत के बीच रहा है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक और वित्त आयोग द्वारा राज्यों के लिए स्वीकार्य मानी जाने वाली सीमा के आसपास है।
तुलना करें तो पंजाब का ऋण-जीएसडीपी अनुपात 45 प्रतिशत से अधिक, पश्चिम बंगाल का लगभग 38-40 प्रतिशत तथा केरल का लगभग 35-40 प्रतिशत के बीच रहा है।
यदि केवल ऋण स्तर को आधार बनाया जाए तो बिहार देश के सर्वाधिक ऋणग्रस्त राज्यों में शामिल नहीं है।
तेजस्वी यादव को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि जिस राशि को वो आर्थिक दिवालियापन बता रहे हैं, दरअसल उसी राशि से राज्य के 94 लाख अधिक बुजुर्ग,विधवा एवं दिव्यांग लाभार्थियों को बढ़ी हुई दर पर पेंशन दी गई है।

तेजस्वी यादव से अहम सवाल:
- तेजस्वी जी, एक शौचालय को 7.41 लाख का बताकर ट्वीट करने से पहले क्या आपने विभागीय पत्र पढ़ा था, या फिर तथ्य जांचने की जिम्मेदारी भी अब सोशल मीडिया के भरोसे छोड़ दी है?
- जब आप सरकार में थे और समाधान यात्रा के दौरान 1.56 लाख रुपये का वीआईपी शौचालय बना था तब आपकी कलम, ट्वीट और नैतिकता तीनों मौन व्रत पर क्यों थे? विपक्ष में आते ही वही खर्च घोटाला कैसे बन गया?
- 94 लाख बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को बढ़ी हुई पेंशन देने के लिए आकस्मिक निधि का उपयोग आपको दिवालियापन लगता है, तो क्या आपकी नजर में जनता के हित में खर्च करना भी आर्थिक अपराध है?
- आकस्मिक निधि के संवैधानिक उपयोग को दिवालियापन बताने से पहले क्या आपने वित्तीय नियम पढ़े थे, या फिर अर्थशास्त्र का ज्ञान भी सोशल मीडिया फेक यूनिवर्सिटी से ही प्राप्त किया है?
