कृषि मंत्री, बिहार श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में फसल विविधीकरण को गति देते हुए हल्दी, अदरक एवं ओल जैसी उच्च-मूल्य उद्यानिकी फसलों को विशेष प्रोत्साहन दे रही है। इसका उद्देश्य छोटे एवं सीमांत किसानों को कम क्षेत्र और अपेक्षाकृत कम निवेश में बेहतर आय के अवसर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य की जलवायु एवं मिट्टी इन फसलों के लिए अत्यंत अनुकूल है, जिससे उत्पादन, लाभ और जोखिम प्रबंधन तीनों में सुधार संभव है।
माननीय मंत्री ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से गरीब परिवारों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण युवाओं के लिए सम्मानजनक, घर के नजदीक और टिकाऊ आजीविका का मजबूत माध्यम बन रही है। उन्होंने बताया कि सरकार उन्नत रोपण सामग्री, आधुनिक उत्पादन तकनीक, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा बाजार से जोड़ने की मजबूत व्यवस्था विकसित कर रही है, ताकि किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर लाभ मिल सके।
श्री राम कृपाल यादव ने कहा कि हल्दी औषधीय एवं मसाला फसल के रूप में, अदरक निरंतर बाजार मांग के कारण तथा ओल कम लागत में बेहतर प्रतिफल देने वाली फसल के रूप में किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी विकल्प हैं। इन फसलों को अपनाने से खेती में विविधता आएगी, जिससे जलवायु परिवर्तन के जोखिम को कम करते हुए किसानों की आय अधिक स्थिर और सुरक्षित बनेगी।
माननीय मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार की प्राथमिकता है कि किसान केवल उत्पादनकर्ता न रहें, बल्कि मूल्य संवर्धन और बाजार से जुड़कर समृद्ध कृषि उद्यमी बनें। हल्दी, अदरक और ओल जैसी फसलें कम क्षेत्र में अधिक आमदनी, कम जोखिम और बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं। इस पहल से महिलाओं को घर-आधारित आय, युवाओं को कृषि-उद्यमिता और छोटे किसानों को जलवायु-अनुकूल एवं लाभकारी खेती का भरोसेमंद विकल्प मिलेगा।
उन्होंने किसान भाई-बहनों से अपील करते हुए कहा कि वे इन फसलों को अपनाकर सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं और समृद्ध बिहार के निर्माण में भागीदार बनें। उन्होंने कहा कि यह पहल खेती से लेकर प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण और विपणन तक स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करते हुए किसान परिवारों के घर-घर समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।
