भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने पूर्वी चंपारण जिले में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की हुई मौत के लिए प्रशासन को जिम्मेवार ठहराया है। पूरे बिहार में सत्ता और पुलिस के संरक्षण में अवैध शराब का कारोबार फल फूल रहा है और इसके शिकार गरीब हो रहे हैं। शराबबंदी वाले बिहार में घर घर शराब की होम डिलेवरी हो रही है। शराबबंदी अपने उद्देश्य से भटक गया है। बिहार के लोगों को अवैध रूप से जहरीली शराब पिलाई जा रही है। पिछले दस वर्षों में बिहार में जहरीली शराब पीने से एक हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है जबकि सैकड़ों लोगों की आंख की रोशनी चली गई है।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि पूर्वी चंपारण से मिली रिपोर्ट के अनुसार चार लोगों परीक्षण मांझी, हीरालाल कामत, प्रमोद कुमार और चंदू कुमार की जहरीली शराब पीने से मौत हो गई है जबकि छः लोगों की आंख की रोशनी चली गई है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मृतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है। साथ ही राज्य सरकार से मृतक के आश्रितों को 50-50 लाख रुपये तथा जिनकी आंखों की रोशनी चली गई है उन्हें 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग करती है। साथ ही मामले की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी व्यक्तियों और संरक्षण देने वाले पुलिस पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि पूरे बिहार में खुलेआम जहरीली शराब बन रही है, धड़ल्ले से पुलिस की मिलीभगत से बेची जा रही है। इसकी कीमत बिहार के गरीब और आम लोग अपनी जान देकर चुका रहे हैं। जब बिहार में चुनाव होते हैं तो उस दौरान हजारों अवैध शराब भट्ठी ध्वस्त किये जाते हैं। चुनाव समाप्त होते ही वह भठ्ठी चालू हो जाता है। पुलिस शराब बनाने व बेचने वाले के बजाए पीने वाले पर कार्रवाई करती है। पिछले दस वर्षों में शराब पीने के जुर्म में 16 लाख लोगों को जेल भेजा गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य सरकार से शराबबंदी को सख्ती से लागू करने और शराब की अवैध कारोबार करने वाले के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग करती है।
