लोकसभा से बहुचर्चित महिला आरक्षण विधेयक के पास नहीं होने को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने काला दिन बताया है। उन्होंने कहा कि इससे आरक्षण का अपमान हुआ और महिलाओं के साथ धोखा हुआ है। राजद, कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि इससे विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। मुख्यमंत्री रविवार को पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में इस विषय पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे।
इस मौके पर एनडीए के सभी घटक दलों की महिला जनप्रतिनिधि भी मौजूद थी। इन्होंने भी विपक्ष पर हमलावर तेवर अख्तियार करते हुए उन्हें आड़े हाथों लिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद पहले भी बिल फड़वा चुके हैं। उनके घर की बेटी और कांग्रेस के राहुल गांधी की बहन संसद बने तो इन्हें कोई गुरेज नहीं है, लेकिन ये कतई नहीं चाहते कि किसी गरीब-गुरबा की बेटी कभी भी संसद बने। इस बिल का विरोध करके इन्होंने अपनी यह मानसिकता उजागर कर दी है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की सोच रही है कि हमारे घर की बहन और बेटी तो सांसद बन जाये लेकिन गरीबो के परिवार का कोई महिला सदस्य सांसद नहीं बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर महिला आरक्षण बिल पास हो जाता, तो बिहार विधानसभा में महिला जनप्रतिनिधि की संख्या 29 से बढ़कर कम से कम 122 हो जाती। इसी तरह देश के संसद में सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाती, जिसमें 216 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाती। जब देश की आबादी 70 करोड़ थी, तब भी संसद में 543 सीटें थी। आज जब आबादी बढ़कर 140 करोड़ हो गई है, तब भी सीटों की संख्या उतनी ही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व वाली सरकार तो 850 तक सांसदों की संख्या बढ़ाने का भरोसा तक दे रहे थे। इसके मद्देनजर भी इस बार सीटों को बढ़ाने की कवायद की जा रही थी, लेकिन कांग्रेस, राजद, डीएमके, टीएमके, सपा समेत अन्य सभी विपक्षी दलों ने महिलाओं के साथ धोखा किया है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि आज जो देश की महिलाओं के साथ धोखा हुआ है, उसके खिलाफ एनडीए एकजुट होकर देश मे अभियान चलाएगी और उनसे जवाब भी मांगेगी। कांग्रेस से पूछा जाएगा कि आपके परिवार के लोग पीएम , सुपर पीएम, सांसद बन रहे हैं, इस देश की गरीब महिला क़ब सांसद बनेगी। यही प्रश्न सपा, राजद, टीएमसी से भी पूछा जाएगा। लोकतंत्र में वह दिन काला अध्याय है जिस दिन महिला आरक्षण बिल , नारी शक्ति के आरक्षण को रोकने का काम यूपीए के लोगों ने किया है।
उन्होंने कहा कि 2006 में जब बिहार में एनडीए की सरकार बनी तो पंचायत और नगर निकायों में 50 फीसदी महिला आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। इसका परिणाम है कि बिहार में पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों में महिला जनप्रतिनिधि की संख्या 59 प्रतिशत से अधिक हो गया है। उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन हो या सवर्ण को 10 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय हो, ये सभी काम एनडीए सरकार ने ही किए हैं। बिहार और देश की महिला को मुख्य धारा में जोड़ने का काम किया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने लगातार महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने लोगों को भरोसा देते हुए कहा कि जिस तरह पीएम मोदी ने देश के लोगों को आश्वस्त किया है कि नारी शक्ति की ताकत को हर हाल में देने का काम किया जाएगा।
इस प्रेस वार्ता में राज्यसभा की सांसद दर्शना सिंह , पूर्व मंत्री लेसी सिंह, राष्ट्रीय लोक मोर्चा की विधायक स्नेहलता कुशवाहा ,हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा की विधायक ज्योति देवी,लोजपा (रामविलास) महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष शोभा सिन्हा पासवान, एमएलसी अनामिका सिंह पटेल, निवेदिता सिंह, एमएलए संगीता कुमारी, महापौर सीता साहू, पटना जिला परिषद की अध्यक्ष स्तुति गुप्ता, महिला आयोग की अध्यक्ष सजल झा, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष अनामिका पासवान, प्रीति शेखर भी उपस्थित थी।
