जद (यू0) प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अंजुम आरा ने जारी बयान में कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक का पारित न हो पाना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। यह केवल एक विधायी प्रक्रिया का अवरोध नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों और उनकी राजनीतिक भागीदारी को लेकर गंभीर असंवेदनशीलता को दर्शाता है। विपक्षी दलों द्वारा इस महत्वपूर्ण विधेयक पर असहयोग का रवैया न केवल उनकी नीयत पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि वे महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कितने प्रतिबद्ध हैं।
महिला आरक्षण केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की दिशा में एक आवश्यक कदम है। बिहार में माननीय श्री नीतीश कुमार ने वर्षों पहले ही पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देकर एक नई शुरुआत की थी, जिसका सकारात्मक प्रभाव आज पूरे राज्य में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यही माॅडल अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की आवश्यकता है।
यह विडंबना ही है कि जिस पहल की शुरुआत बिहार से हुई और जिसने महिलाओं को सशक्त बनाने का रास्ता दिखाया, उसी दिशा में जब केंद्र सरकार आगे बढ़ना चाहती है, तब विपक्षी दल बाधा बनते नजर आते हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विपक्ष वास्तव में महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीर है, या फिर यह केवल राजनीतिक लाभ-हानि का खेल बनकर रह गया है।
उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी यह स्पष्ट करना चाहती है कि महिलाओं के अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। देश की जनता सब देख रही है और समझ रही है। जो दल महिला सशक्तिकरण के इस ऐतिहासिक अवसर पर साथ नहीं खड़े हुए, उन्हें भविष्य में इसका राजनीतिक और सामाजिक परिणाम अवश्य भुगतना पड़ेगा।
