भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा दिनांक 29 अप्रैल 2026 को मनीछपरा गांव, कल्याणपुर प्रखंड, जिला मोतिहारी में “कार्बनिक एवं हरी खाद के उपयोग” विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा ढैंचा बीज का वितरण किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को हरी खाद के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार तथा रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरी खाद के लिए एक हेक्टेयर में ढैंचा उगाकर उसे खेत की मिट्टी में मिलाने से किसान लगभग 40–50 किलोग्राम यूरिया की बचत कर सकते हैं तथा मिट्टी की उर्वरता में भी वृद्धि होती है।

वैज्ञानिकों ने फसल चक्र में धान्य फसलों के बीच दलहन फसलों को शामिल करने पर भी जोर दिया। इस अवसर पर जैविक खेती को बढ़ावा देने हेतु किसानों के बीच 200 किलोग्राम ढैंचा बीज का वितरण किया गया। साथ ही वर्मी कम्पोस्ट, गोबर की खाद एवं अज़ोला के उपयोग तथा उनके लाभों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्यक्रम में कुल 68 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 12 महिला किसान भी शामिल थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के फसल अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख डॉ. संजीव कुमार (प्रधान वैज्ञानिक) ने की। इस अवसर पर डॉ. शिवानी (प्रधान वैज्ञानिक), डॉ. रोहन कुमार रमण (वरिष्ठ वैज्ञानिक) एवं कृषि विज्ञानं केन्द्र, पिपराकोठी के डॉ. अरविंद कुमार (वरिष्ठ वैज्ञानिक) ने किसानों के साथ कृषि में उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर विचार-विमर्श किया। अंत में किसानों ने अपने खेतों में हरी खाद एवं वर्मी कम्पोस्ट के उपयोग को अपनाने का संकल्प लिया।
