मिथिला एवं मैथिली भाषा प्रेमियों के लिए अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के पाठ्यक्रम में मैथिली भाषा को शामिल किए जाने की दिशा में सकारात्मक पहल की गई है। यह निर्णय न केवल मैथिली भाषा और संस्कृति को नई पहचान देगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का भी कार्य करेगा।

जदयू दिल्ली प्रदेश के प्रदेश महासचिव सर्वेश कश्यप ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए केंद्र सरकार, शिक्षा मंत्रालय एवं केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री Jayant Chaudhary का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह मिथिला वासियों के लिए “एक अद्भुत और ऐतिहासिक क्षण” है। वर्षों से मैथिली भाषा को शैक्षणिक मुख्यधारा में उचित स्थान दिलाने की मांग की जा रही थी, जिसे अब गंभीरता से स्वीकार किया गया है।

सर्वेश कश्यप ने आगे कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा सकारात्मक पहल करना सराहनीय है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने का यह कदम भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

उन्होंने कहा कि मैथिली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपरा और भावनात्मक पहचान का आधार है। CBSE पाठ्यक्रम में इसके शामिल होने से देशभर के लाखों विद्यार्थियों को अपनी भाषा में सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। जदयू दिल्ली प्रदेश ने आशा व्यक्त किया है कि आने वाले समय में मैथिली भाषा को शिक्षा, प्रशासन और तकनीकी क्षेत्रों में भी व्यापक रूप से बढ़ावा दिया जाएगा।
