पटना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा है कि ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में भूमि की बिक्री पर रोक हटाना किसानों के साथ धोखा है। सरकार ने किसानों को बिहार राज्य आवास बोर्ड और पूंजीपतियों के हाथों जमीन बेचने को मजबूर कर रही है। सरकार के फैसले से आम व्यक्ति किसानों से जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि कैबिनेट की फैसले से साबित हो गया है कि सम्राट चैधरी की सरकार सेटेलाइट टाउनशिप के निर्माण के नाम पर बड़े कारपोरेट घरानों को जमीन लूटने की खुली छूट दे दी है। इस निर्णय से सरकार का चेहरा पूरी तरह कॉरपोरेट पक्षधर और जनविरोधी हो चुका है तथा किसानों और भूमिधारकों को अपनी ही जमीन बेचने से रोका जा रहा है जिससे उनकी आर्थिक आजादी छीनी जा रही है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मानती है कि शहरीकरण के नाम पर किसानों की जमीन पर यह हमला नवउदारवादी-पूँजीपरस्त नीति का हिस्सा है। सरकार शहरी विस्तार का बहाना बनाकर भूमि अधिग्रहण और बाजार नियंत्रण के माध्यम से कॉरपोरेट को लाभपहुँचाना चाहती है। खरीद-बिक्री पर रोक लगाकर सरकार ने किसानों को न तो उचित मुआवजा देने की गारंटी दी है और न ही पुनर्वास की कोई योजना। यह संविधान प्रदत्त संपत्ति के अधिकार और आजीविका के अधिकार पर सीधा हमला है।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि पार्टी की राज्य परिषद् की बैठक में प्रस्ताव पारित कर सेटेलाइट टाउनशिप के नाम पर किसानों की जमीन की खरीद-बिक्री पर लगाया गया प्रतिबंध तत्काल वापस लेने की मांग की गई थी। किसी भी भूमि अधिग्रहण से पूर्व ग्रामसभा की सहमति, पारदर्शी मूल्य निर्धारण और पुनर्वास-पुनस्र्थापन की गारंटी सुनिश्चित की जाए। कॉरपोरेट घरानों को भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और सार्वजनिक भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाए। सरकार शहरी विस्तार की नीति में किसानों, भूमिहीनों और शहरी गरीबों की भागीदारी सुनिश्चित करे।
