बिहार विधानसभा के माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने आपातकाल के उस कठिन दौर को याद करते हुए कहा कि आपातकाल हमारी लोकतांत्रिक यात्रा का एक काला अध्याय है। हमने उसके दुष्प्रभाव और दुष्चक्र को निकट से देखा है। 25 जून का स्मरण हमें यह सीख देता है कि लोकतंत्र कोई स्थायी उपलब्धि नहीं, बल्कि एक निरंतर साधना है।
आपातकाल का इतिहास इस बात का प्रमाण है कि नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मर्यादाएं ही किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का सार सत्ता के प्रति प्रश्न पूछने और संवाद बनाए रखने में निहित है। एक जिम्मेदार समाज के रूप में हमारा यह संकल्प होना चाहिए कि हम लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा हेतु सदैव सतर्क रहें। संवैधानिक गरिमा का संरक्षण किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हर जागरूक नागरिक का सामूहिक एवं संवैधानिक दायित्व है। वास्तव में, एक सजग और सक्रिय नागरिक ही लोकतंत्र का सबसे मजबूत आधार है।
