विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि राज्य में झूठ की वाहवाही हो रही है। जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा है। जंगलराज कायम है। लेकिन, इसकी आलोचना नहीं की जा सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के रचनात्मक कार्यों में विपक्ष पूरा सहयोग करेगा।
वे गुरुवार को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर पेश धन्यवाद के प्रस्ताव के विरोध में बोल रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सलाह दी कि राज्य को विशेष दर्जा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री से मिलें।
हम साथ दिल्ली चलेंगे। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है। नीट की तैयारी कर रही छात्रा की हत्या कर दी गई।
हर जिले में प्रतिदिन हत्या,लूटपाट और दूसरे तरह के आपराधिक वारदातें होती रहती हैं। महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं।भाजपा महिलाओं का अपमान कर रही है।
उत्तराखंड के एक भाजपा नेता ने कहा था कि बिहार में 20-25 हजार रुपये में महिलाएं बिकती हैं।तेजस्वी के इस आरोप का एनडीए विधायकों ने विरोध किया।
तेजस्वी ने कहा कि राज्य सरकार ने आरक्षण की सीमा बढ़ाने का कानून बनाया था।आरक्षण की सीमा को 65 प्रतिशत किया गया था।
आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को दिए जाने वाले आरक्षण को जोड़ दें तो इसकी सीमा 75 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। लेकिन, यह कानून लागू नहीं हुआ।
सरकार चाहे तो इस कानून को संविधान की नौंवी अनुसूची में डाल कर आरक्षण को बचा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य में पिछड़ों, अति पिछड़ों, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए 85 प्रतिशत आरक्षण का प्रविधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य की हालत की चर्चा करते हुए कहा-यहां थाना खामोश, प्रशासन बेहोश और सरकार मदहोश है। बेशक सरकार डबल इंजन की है।
दो-दो उप मुख्यमंत्री भी हैं। लेकिन, आम जनता का काम नहीं हो रहा है। बिहार जहां 1961 में था, वहीं आज भी खड़ा है।
उन्होंने कहा कि नौकरी और रोजगार देने की घोषणा हमने की थी। सरकार इसके लिए वाहवाही बटोर रही है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में जीत के लिए सरकारी धन का उपयोग किया गया। तेजस्वी ने कहा-हमारा भी दौर आएगा।
पैर के अंगूठे के कारण दर्द से कराह रहे तेजस्वी यादव को बैठ कर भाषण करने की अनुमति मिली। वे खड़े होकर पढ़ रहे थे।
लेकिन, दर्द के कारण बीच-बीच में भाषण का क्रम भंग हो जा रहा था। तेजस्वी ने कहा कि दर्द बहुत ज्यादा है। एंटीबायोटिक पर चल रहे हैं। तेजस्वी के आग्रह पर विधानसभा अध्यक्ष डा. प्रेम कुमार ने उन्हें बैठ कर बोलने की अनुमति दी।

