कल नई दिल्ली में श्री Om Birla जी, माननीय अध्यक्ष लोकसभा से मुलाकात कर हमने 6 फरवरी की पूरी घटना से उन्हें साक्ष्यों सहित अक्षरशः अवगत कराया और इस गंभीर मामले में संज्ञान लेकर न्यायोचित कार्रवाई करने का आग्रह किया। हमने बताया कि किस तरह कुछ नेताओं, पटना पुलिस के वरीय अधिकारी और एक कथित रूप से सेल के इंस्पेक्टर ने रात करीब साढ़े 9 बजे मेरे पटना आवास पर बिना किसी वारंट के चढ़ाई की—मानो मैं कोई फरार अपराधी हूँ। आधी रात को सैकड़ों पुलिसकर्मियों के साथ मुझे उस मामले में गिरफ्तार किया गया, जिसकी सूचना तक मुझे कभी नहीं दी गई थी। खराब स्वास्थ्य के बावजूद मैंने अनुरोध किया कि मुझे हाउस अरेस्ट कर लिया जाए, लेकिन एक सांसद के विशेषाधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी करते हुए मुझे गिरफ्तार कर लिया गया।

इसके बाद रात के अंधेरे में मुझे IGIMS ले जाया गया, जहाँ घंटों स्ट्रेचर पर लॉबी में रखा गया और पुलिस का व्यवहार भी बेहद अमानवीय रहा। अगले दिन अदालत के आदेश के बावजूद मुझे PMCH में उचित इलाज नहीं मिला और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से मुझे जल्दबाजी में बेउर जेल भेज दिया गया। आज भी मैं दिल्ली में अपना इलाज करवा रहा हूँ। हमने यह भी स्पष्ट किया कि मेरे खिलाफ आंदोलन और आचार संहिता से जुड़े मामलों के अलावा कोई आपराधिक केस नहीं है, फिर भी सुनियोजित तरीके से मुझे फंसाने और मेरी आवाज दबाने की कोशिश की गई।

महोदय से हमने कहा कि यह सब केवल इसलिए किया गया ताकि मैं उस नीट की मेधावी बेटी के लिए न्याय की आवाज न उठा सकूँ, जिसके साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई और जिसे दबाने में पुलिस, माफिया और कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत सामने आ रही है। हमने उनसे अपील की कि लोकतंत्र में एक जनप्रतिनिधि की आवाज को कुचलने की ऐसी साजिश पर कठोर कार्रवाई हो और दोषियों को किसी भी हालत में बख्शा न जाए। मुझे न्यायपालिका और जनता रूपी भगवान पर भरोसा था—इसी विश्वास से मैं जेल से बाहर आया हूँ, लेकिन लगातार हो रही इन साजिशों के खिलाफ अब निर्णायक न्याय की आवश्यकता है।
