रमजान के पाक महीने में अमरीका और इजरायल की संयुक्त सेनाओं ने शनिवार 28 फरवरी, 2026 की सुबह ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए हैं, जिसे अमरीका ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ और इजरायल ने ‘ऑपरेशन लायंस रोर’ नाम दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ‘ऑब्जेक्टिव्स’ पूरे होने तक युद्ध रुकेंगा नहीं। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई शहीद हो गए हैं। अमरीका और इजरायल के इस बिना किसी उकसावे के बर्बर हमले में दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान प्रांत के मीनाब शहर के एलिमेंट्री गर्ल्स स्कूल में करीब 185 मासूम लड़कियों की मौत हुई है।
रमजान के पवित्र महीने में हुए इस हमले और मासूमों की मौत ने पूरे इस्लामिक जगत और मानवीय मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों को भीतर से झकझोर दिया है। अमरीका और इजरायल द्वारा ईरान पर हुआ यह हमला सिर्फ ईरान की संप्रभुत्ता पर आघात नहीं है, बल्कि यह कानून पर आधारित वैश्विक व्यवस्था और संपूर्ण मानव सभ्यता पर बर्बर आघात है। तंजीम-ए-इंसाफ इस नाजुक और ग़म के वक्त अंतर्राष्ट्रीय मसलों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखने वाले सभी लोगों एवं राष्ट्रों और विशेषकर खाड़ी देशों की जनता से अपील करता है कि वह अमरीका और इजरायल के नापाक हरकतों का पूरजोर विरोध करें तथा अपने-अपने देशों की सरकारों पर दवाब बनाएं कि उनकी भूमि का इस्तेमाल ईरान के लोगों और संप्रभुता पर हमले करने के लिए न किया जाए। यह वक्त शिया और सुन्नी सहित सभी किसी भी सामाजिक विभेद में न पड़ कर मानव सभ्यता, जनतांत्रिक व्यवस्था और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पक्ष में खड़ा होने का है।
