पटना के बापू सभागार में आयोजित मगही महोत्सव 2026 के उद्घाटन कार्यक्रम में बिहार विधान सभा अध्यक्ष शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मगही महोत्सव हमारी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और लोकजीवन का जीवंत सांस्कृतिक पर्व है, जो हमारी पहचान, हमारी जड़ों और हमारी समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

मगही भाषा बिहार के मगध क्षेत्र की प्रमुख भाषा है जो सदियों पुरानी विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। यह वही मगध की धरती है, जहाँ प्राचीन काल में महान साम्राज्य फले-फूले और जहाँ से ज्ञान, संस्कृति और सभ्यता का प्रकाश पूरे विश्व में फैला।
मगही भाषा में लोकगीत, कहानियाँ, मुहावरे और लोककथाएँ हमारी संस्कृति का अमूल्य खजाना हैं। इसकी मिठास, सरलता और लोकभावना इसे विशेष बनाती है। यहाँ के लोकगीतों में जीवन की सादगी, प्रेम, संघर्ष और उल्लास की झलक मिलती है। मगही नाटक और नृत्य हमारी परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं।
मगही महोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहाँ कलाकारों, साहित्यकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। यह महोत्सव नई पीढ़ी को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
मगही महोत्सव हमें अपनी उस धरोहर की याद दिलाता है, जिसे हमें सहेजकर रखना है। हमें यह समझना होगा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह हमारी पहचान, हमारी सोच और हमारी संस्कृति की आत्मा होती है। यदि हम अपनी भाषा को भूल जाते हैं, तो हम अपनी जड़ों से कट जाते हैं। आज वैश्वीकरण के इस दौर में कई स्थानीय भाषाएं और संस्कृतियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं, तब इस तरह के महोत्सव हमें अपनी पहचान बनाए रखने की प्रेरणा देते हैं।
आज आवश्यकता है कि हम मगही भाषा को शिक्षा, साहित्य और दैनिक जीवन में अधिक से अधिक स्थान दें। हमें अपने बच्चों को मगही बोलने, पढ़ने और समझने के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी संस्कृति पर गर्व कर सकें।
उन्होंने मगही महोत्सव के आयोजकों को धन्यवाद देते हुए इस आयोजन को अपनी भाषा और संस्कृति को बचाने और बढ़ाने का आंदोलन बताया।
इस अवसर पर इस महोत्सव के आयोजक सर्वश्री उज्जवल कुमार, रविशंकर उपाध्याय, विजेता चंदेल, निराला विदेशिया सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
