बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि शिक्षकों की बहाली के लिए टीआर 4 के अभ्यर्थियों ने सरकार से बहाली प्रक्रिया को जल्द से जल्द शुरू कराने के लिए कल जो आंदोलन किया था, उस पर हुए लाठी चार्ज और दौड़ा दौड़ा कर पीटे जाने की घटना से ये स्पष्ट हो गया कि बिहार में नौकरी और रोजगार वाली सरकार नहीं है,
बल्कि नौकरी छीनने वाली सरकार है। और नौजवान और छात्र जब न्याय और नौकरी की मांग करते हैं तो यह मान कर चलना चाहिए के के जब भी नौकरी मांगने जाएंगे तो राज्य सरकार की ओर से उन्हें लाठी से ही पीटा जाएगा और जो छात्र पिटने से बच गए हैं उन पर एफआईआर दर्ज किया जाएगा और उन्हें पुलिस खोजती हुई दिखेगी। जैसा की कल के आंदोलन कार्यक्रम में शामिल छात्र और नौजवानों को राज्य सरकार के द्वारा गांधी मैदान थाना में चार नामजद और पांच हजार के करीब अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। और पुलिस आंदोलनकारी को वीडियो फुटेज के आधार पर खोज रही है, ऐसा लग रहा है कि इन लोगों ने नौकरी मांग कर कोई बड़ा अपराध कर दिया है।
एजाज ने आगे कहा कि बिहार में सरकार के स्तर ने पांच सालों में एक करोड़ नौकरी की बात की है, जबकि हकीकत यह है की शिक्षकों की बहाली के प्रति सरकार की उत्सुकता नहीं है । और सरकार नहीं चाहती है की नौजवानों को नौकरी दी जाए और उनकी बहाली की जाए।
इन्होंने आगे कहा कि बिहार में नौकरी और रोजगार वाली नहीं बल्कि नफरत वाली सरकार है और नौजवानों को नफरत की राजनीति में झोंक कर नौकरी और रोजगार से दूर करना चाहती है। सरकार की यही नियति है इसीलिए जब भी नौकरी की बात नौजवान करते हैं तो उन पर लाठी का प्रहार होता है और उनके साथ अत्याचार होता है। बिहार में जो सरकार है ये न्याय देने वाली नहीं बल्कि अन्याय करने वाली सरकार है।
इन्होंने आगे कहा कि तेजस्वी जी ने अपने 17 महीने के महागठबंधन सरकार के कार्यकाल में दो लाख सत्रह हजार शिक्षकों की बहाली की थी, और और साढ़ें पांच लाख के करीब नौकरियां दी थी। तेजस्वी जी ने नफरत के खिलाफ नौकरी और रोजगार वाली सरकार के माध्यम से नौजवानों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाया था,जबकि सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार नौजवानों के चेहरे पर लाठी का प्रहार और आंखों में आंसू देने का काम कर रही है।
