बिहार के कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कृषि आधारित स्टार्टअप, कृषि नवाचार एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में किसानों तक नई तकनीकों की पहुँच सुनिश्चित करने, युवाओं एवं महिलाओं को कृषि उद्यमिता से जोड़ने तथा कृषि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बिहार की वास्तविक समृद्धि गाँवों की समृद्धि से जुड़ी है। कृषि आधारित स्टार्टअप केवल तकनीकी नवाचार का माध्यम नहीं, बल्कि रोजगार, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण पुनर्जागरण का सशक्त अभियान हैं। उन्होंने कहा कि यदि कृषि, प्रसंस्करण, भंडारण, विपणन, ड्रोन तकनीक, स्मार्ट सिंचाई और एग्री-लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में युवाओं को अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, तो लाखों युवाओं को अपने ही गाँव और जिले में सम्मानजनक रोजगार मिल सकता है।
श्री सिन्हा ने कहा कि कृषि आधारित उद्यमों और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर राज्य सरकार ऐसा वातावरण तैयार कर रही है, जहाँ युवा ‘नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले’ बन सकें। इससे न केवल पलायन में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
उन्होंने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में डबल इंजन की बिहार सरकार ‘सात निश्चय-3’ के संकल्पों को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। कृषि क्षेत्र में नवाचार, कौशल विकास, स्वरोजगार, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के माध्यम से सरकार विकसित एवं आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। कृषि आधारित स्टार्टअप इस संकल्प को गति देने वाले महत्वपूर्ण स्तंभ साबित होंगे।
कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों एवं स्टार्टअप इकाइयों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित किया जाएगा ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक सीधे किसानों के खेतों तक पहुँच सके। इसके लिए एक सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा, जहाँ किसान, शोधकर्ता, उद्यमी और निवेशक एक साझा मंच पर जुड़ सकेंगे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कृषि विज्ञान केंद्रों एवं कृषि विश्वविद्यालयों में स्टार्टअप आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे तथा कृषि महाविद्यालयों में नवाचार एवं स्टार्टअप प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को अपने विचारों को व्यवसायिक रूप देने का अवसर प्राप्त हो सके।
श्री सिन्हा ने विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर बल देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में उनकी ऊर्जा, नवाचार क्षमता और नेतृत्व को प्रोत्साहित करना समय की आवश्यकता है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्टार्टअप्स को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करने की व्यवस्था भी विकसित की जाएगी, ताकि अधिकाधिक युवा कृषि उद्यमिता की ओर आकर्षित हों।
उन्होंने मखाना, फल-सब्जी प्रसंस्करण, कोल्ड स्टोरेज, सप्लाई चेन, कृषि विपणन, स्मार्ट सिंचाई तथा कृषि लॉजिस्टिक्स से जुड़े नवाचारों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। साथ ही कृषि उत्पादों की ट्रेसबिलिटी एवं पारदर्शी प्रबंधन के लिए आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
अंत में कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि आधारित स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने से ‘समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर युवा, सशक्त गाँव और विकसित बिहार’ के निर्माण होगा। यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार सृजित करने, पलायन रोकने और बिहार को कृषि नवाचार एवं कृषि उद्यमिता का अग्रणी राज्य बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाएगी।
‘जब गाँव समृद्ध होंगे, किसान सशक्त होंगे और युवाओं को अपने घर-गाँव में अवसर मिलेंगे, तभी विकसित बिहार और विकसित भारत का सपना साकार होगा।’
