पटना। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव रामनरेश पाण्डेय ने कहा कि नियंत्रण एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट ने बिहार सरकार की वित्तीय व्यवस्था की पोल खोल दी है। बिहार लगातार राजस्व घाटे में जा रहा है। सरकार की जितनी आमदनी नहीं है, उससे ज्यादा खर्च कर रही है। सरकार कर्ज लेकर राजस्व घाटे को पूरा कर रही है। वेतन और पेंशन देने के लिए भी सरकार के पास पैसा नहीं है। बिहार सरकार कर्ज और भारतीय रिजर्व बैंक से अग्रिम लेकर अपना कार्य चला रही है। हाल ही में सरकार रिजर्व बैंक से 12 हजार करोड़ रुपये के अग्रिम की मांग की है।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की राज्यों के वित्त की तीसरी वार्षिक समीक्षा में कहा गया है कि 2024-25 में बिहार ने सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे की सीमा को पार कर लिया है। लाख करोड़ रुपये हो गया है। राजस्व घाटे का असर बिहार के विकास पर साफ दिख रहा है। विकास योजनाएं ठप हो गई। ठेकेदारों के भुगतान पर रोक लगा दी गई।
शिक्षकों, कॉलेज शिक्षको, विश्वविद्यालय कर्मियों, संविदा कर्मचारियों, स्कीम वर्करों आदि को कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। बिहार का कर्ज लगातार बढ़ते जा रहा है। कर्ज चार लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच गया है। जो राज्य सरकार की वित्तीय संकट की ओर इशारा करता है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी राज्य सरकार से वित्तीय स्थिति सुधारने और सभी सरकारी कर्मचारियों के बकाए वेतन के भुगतान की मांग करती है।
