बिहार का सबसे पहला पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के तहत समस्तीपुर के सरायरंजन क्षेत्र में एक बड़ा विवाद सामने आया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव में आने से एक्सप्रेस-वे के रूट को बदला है। मामले में जन सुराज पार्टी कार्यालय में बुधवार को प्रेस वार्ता की गई। जिसमें पार्टी की वरिष्ठ नेत्री पद्मा ओझा, प्रवक्ता विवेक कुमार व प्रवक्ता कैप्टन राजीव रंजन मुद्दा उठा सरकार से मांग की।

किसी खास व्यक्ति की 10.5 बीघा जमीन प्रोजेक्ट की जद में आने से किया बदलाव: पद्मा ओझा
पद्मा ओझा ने कहा कि मामले में सरायरंजन के 24 से अधिक मकान मालिकों-दुकानदारों ने केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को शिकायत पत्र लिखा है। आरोप ये है कि किसी खास व्यक्ति की 10.5 बीघा जमीन प्रोजेक्ट की जद में जा रही थी, जिसके बाद प्रोजेक्ट में बदलाव किया गया। इससे 7 गांव, 150 मकान, कुछ दुकानें, केदार संत रामाश्रय कॉलेज का कुछ भाग प्रभावित है। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे स्थानीय व अन्य लोगों की सुविधा के लिए बनाया जा रहा है या लोगों के जीवन को जटिल बनाने के लिए। सरकार व एनएचएआई का कहना है जो रूट है हम उसपर काम कर रहे हैं। लेकिन, स्थानीय लोगों की बात इससे अलग है। स्थानीय लोग रूट परिवर्तन का आरोप लगा रहे हैं, ये जांच का विषय है। आधिकारिक तौर पर सरकार का दावा है कि रूट में कोई बदलाव नहीं है। जन सुराज विकास के खिलाफ नहीं है, लेकिन, विकास के नाम पर पारदर्शिता खत्म हो, जनता की आवाज दबाई जाए ये गलत है। सरकार सभी दस्वावेज सार्वजनिक करे व निष्पक्ष जांच कराए। ताकि जनता संतुष्ट हो।

भागलपुर के पुल में पैचवर्क से पूरे बिहार का मजाक देशभर में हो रहा: विवेक कुमार
जन सुराज के प्रवक्ता विवेक कुमार ने कहा कि ये सरकार कहीं न कहीं पैचवर्क वाली सरकार है। अब पूरे बिहार का मजाक देशभर में हो रहा है। भागलपुर के पुल में पैचवर्क कर दिया है, ये और कहीं नहीं केवल बिहार में देखने को मिलेगा। चुनाव जैसे-जैसे करीब आएगा तब उसपर काम होगा। ग्रीनफील्ड के मामले में विवेक ने कहा कि 13 मार्च 2025 को पहला गैजेट नोटिफिकेशन निकला, जिसमें 3 गांव आते हैं वाजितपुर, सुरमार 292, सुरमार 293, 26 मार्च 2025 को दूसरा गैजेट नोटिफिकेशन निकला, जिसमें परिवर्तन किया गया, जिसमें नए ब्राउनफील्ड को जोड़ा गया, जहां लोग रह रहे हैं, कॉलेज है। अप्रैल-जून तक ड्रोन से सर्वे किया गया। लोगों ने पत्र लिख नितिन गडकरी से मांग की, बदलाव कर कहीं न कहीं कुछ लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। निष्पक्ष जांच की जाए व तबतक भूमि अधिग्रहण को रोका जाए।

प्रेस कांफ्रेंस कर जन सुराज ने उठाए 10 सवाल, जवाब दे सरकार
– यदि रूट में कोई बदलाव नहीं हुआ तो सरकार का मूल डीपीआर, प्रारंभिक अलाइंमेंट व अंतिम स्वीकृति अलाइंमेंट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा?
– सरकार बताए कि सरायरंजन क्षेत्र के प्रभावित लोगों की आपत्तियों पर कितनी सुनवाई हुई व क्या जवाब दिया?
– सरकार इस बात की स्वतंत्र जांच कराने को तैयार है कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक हस्ती के दबाव में रूट बदला है या नहीं?
– यदि 150 से अधिक घर-दुकानें व 1 कॉलेज का हिस्सा प्रभावित हो रहा है तो इसके वैकल्पिक मार्गों का अध्यन किया गया है या नहीं?
– भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने कौन-कौन से दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं?
– क्या सरकार प्रभावित परिवारों की सूची, मुआवजा दर, पुनर्वास योजना के दस्तावेज को सार्वजनिक करेगी?
– यदि रूट परिवर्तन का आरोप गलत है तो सरकार स्वतंत्र तकनीकी समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है?
– क्या बिहार में विकास परियोजना का उद्देश्य जनता को सुविधा देना है या कुछ प्रभावशाली लोगों के हितों की रक्षा करना है?
– सरकार बताए कि परियोजना के तकनीकी आधार पर रूट तय हुआ है या राजनीतिक प्रभाव के आधार पर?
– क्या मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री पूरे मामले की न्यायिक या उच्च जांच की मांग का समर्थन करेंगे?
