राजधानी पटना का राजनीतिक परिदृश्य यादव और कायस्थों के बीच उलझा रहा है। परिसीमन के पहले से पटना के सांसद यादव, कायस्थ और भूमिहारों के पिटारे से निकलते रहे हैं। पिछले कई चुनाव से राजधानी की सीट पर कायस्थों का कब्जा रहा है।
राजधानी की प्रमुख सीटों में एक सीट है बांकीपुर विधान सभा सीट। यहां के पूर्व विधायक नितिन नवीन अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और राज्यसभा सदस्य। उनकी जूठन वाली सीट पर किसकी पत्तल बिछती है, यह अगले एक-दो माह में होने वाले उपचुनाव में तय हो जाएगा। इस चुनाव में हम भी एक उम्मीदवार होंगे। हमारी कोशिश है कि लाला के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर ग्वाला का कब्जा हो। इसी मकसद से हम चुनाव लड़ रहे हैं।

बांकीपुर विधान सभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव को यादव अस्मिता का सवाल बना देना है। राजधानी पटना का यादव बूथ पर राजद के साथ नहीं होता है। इसी कारण पिछले 30 सालों से राजधानी की कोई भी विधान सभा सीट राजद नहीं जीत पाया है। राजद का उम्मीदवार पार्टी के आधार पर कभी कोई सीट जीत भी नहीं सकता है।
बांकीपुर विधान सभा सीट पर 20 प्रतिशत से अधिक वोटर अकेले यादव जाति के हैं। पटना नगर निगम के तहत आने वाली इस सीट पर करीब आधे वार्ड पार्षद अकेले यादव जाति के हैं। ये सभी निर्दलीय रूप से निर्वाचित होते रहे हैं। दलीय आधार पर इनकी जीत मुश्किल हो जाएगी।

इसी कारण जब हमने चुनाव लड़ने की प्लानिंग शुरू की तो यह तय किया कि निर्दलीय ही चुनाव लड़ना है। हालांकि पहचान के लिए ‘बांकीपुर जनता पार्टी‘ बनाया है, लेकिन तकनीकी रूप से इसकी हैसियत राजनीतिक दल की नहीं है। चुनाव में उम्मीदवार के रूप हमें हमारी स्थिति निर्दलीय ही रहेगी।
यादव अस्मिता की लड़ाई बनाने की वजह रही है कि इससे शुरुआती दौर में स्वजातीय लोग स्वाभाविक रूप से पार्टी से जुड़ेंगे। हम यह मानते हैं कि सामाजिक रूप से यह रणनीति सही नहीं है, लेकिन राजनीतिक रूप से यह जरूरी है। राजनीति की आत्मा जाति से जुड़ी होती है और इसके बिना एक कदम चलना भी मुश्किल है।
आज सम्राट चौधरी से सवर्ण इसलिए विक्षुब्ध हैं कि भाजपा का मुख्यमंत्री कोईरी बन गया और यादव इसलिए नाराज हैं कि सम्राट चौधरी की राजनीति ही यादव के खिलाफ नफरत पर टिकी है। कहने का मतलब है कि जाति के बिना राजनीति की कल्पना नहीं की जा सकती है। इसी भावना को ताकत देने के लिए हमने जाति की ताकत का अहसास अपने लोगों को करा रहे हैं, ताकि जीत हासिल कर सकें।
