राष्ट्रीय जनता दल के राज्य कार्यालय के कर्पूरी सभागार पटना में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि एनडीए की दिवालिया राजनीति और दिवालिए नेतृत्व के कारण प्रदेश की बिगड़ चुकी वित्तीय स्थिति, घोटालों पर घोटाले, घटता राजस्व, बढ़ता राजकोषीय घाटा, कर्ज, भारी ब्याज अदायगी, बेकाबू भ्रष्टाचार तथा खोखली व अदूरदर्शी नीतियों के कारण हमारा बिहार कंगाल होने के कगार पर है। खजाना खाली होने के कारण प्रदेश में अराजकता वित्तीय हालात है।

कर्मचारियों को वेतन, छात्रों को छात्रवृत्ति, पेंशनरों और किसानों को देने के लिए सरकार के खजाने में पैसे ही नहीं हैं। थोड़ा बहुत जो फंड है उसे भ्रष्ट अधिकारी अपनी प्राथमिकताओं और पसंद के आधार पर बंदरबांट कर डकार जाते हैं।
अभी बतोलेबाज ब्ड ने आकस्मिक फंड से 3,660 करोड़ रुपए निकाले हैं। केंद्र के सामने बार बार झोली फैला रहे हैं, गिड़गिड़ा रहे हैं लेकिन केंद्र ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
हर बार एक बड़ा घोटाला उजागर होता है, कुछ छोटे किरानी-कर्मचारी गिरफ्तार होते हैं। लेकिन नीतीश-ठश्रच्-छक्। के राज में इस संगठित संस्थागत भ्रष्टाचार के मुख्य सरगना, डंेजमत डपदक, ताकतवर, प्रभावशाली और लाभार्थी लोग कभी भी गिरफ्तार नहीं होते, उन तक कोई जांच एजेंसी नहीं पहुँच पाती? चाहे वो एस्टीमेट घोटाला हो, सृजन घोटाला हो, ब्।ळ घोटाला हो या टेंडर घोटाला हो।
हमने जो-जो कहा, वैसे वैसे हुआ और हो भी रहा है। हमने कहा था कि बिहार में क्ज्ञ ज्ंग दिए बिना कोई कार्य नहीं होता। क्ज्ञ ज्ंग छक्। के भ्रष्टाचार का केंद्र बिंदु है। हमारे 17 महीने की महागठबंधन सरकार में हमने क्ज्ञ टैक्स पर अंकुश लगाकर जतंदेचंतमदज गवर्नेंस पर ध्यान दिया था। हम लोगों को 5 लाख नौकरी देने में लग गए थे जिससे भ्रष्ट अधिकारियों में बेचैनी थी क्योंकि कंस्ट्रक्शन के नाम पर कमीशन खाने वाले अधिकारियों की काली कमाई पर अंकुश लग गया था। फिर इन्होंने अपने कठपुतली ब्ड से जो चाहा वो कराया।

रिशु श्री महाघोटाले पर 21 साल की एनडीए सरकार से हमारे कुछ सवाल हैं:-
1. एक मामूली सा ठेकेदार (रिशु श्री) कई विभागों के टेंडरों को अपनी मर्जी से कैसे मैनेज कर रहा था? सरकार का निगरानी तंत्र इतने वर्षों तक क्या कर रहा था? या अधिकारियों द्वारा निजी लाभ के लिए सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा था?
2. म्क् की जांच में सामने आए चैट्स से पता चलता है कि रिशु श्री कई वरिष्ठ अधिकारियों के प्रभावशाली कॉकस को सत्ता और सर्वोच्च अधिकारियों का संरक्षण कैसे प्राप्त था? वह अधिकारियों को निर्देश देता था।
3. चार्जशीट में बड़ी मछलियों को छोड़ दिया गया है? क्या ऐसा करने में देरी के पीछे क्या कोई राजनैतिक दबाव है अथवा सत्ता में बैठे राजनेताओं को खुद पकड़े जाने का डर है?
4. दो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया लेकिन चार्जशीट में उनका नाम नहीं है? उनकी तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? क्या सरकार को उनसे सबके पत्ते खोल देने की धमकी मिली है? भाजपा और जदयू ने सत्ता संरक्षित और पोषित भ्रष्टाचारियों को सजा से इम्यूनिटी क्यों दिया हुआ है?
5. वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गिरफ्तारी के बाद, क्या सरकार ने इस बात की समीक्षा की है कि इन्होंने अब तक कुल कितने करोड़ के सरकारी फंड को डायवर्ट किया? और अगर हां तो इस राशि को सार्वजनिक करने में देरी क्यों की जा रही है? क्या सरकार में बैठे लोगों को इसमें से ‘‘कट’’ मिलना बाकी है?
6. आरोपी रिशु श्री पहले से तय करता था कि ठेका किसे मिलेगा और उसी हिसाब से विभागीय टेंडर की शर्तें (क्राइटेरिया) बदलवा देता था। क्या इस सिंडिकेट के सरगना मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय व निवास में बैठे अधिकारी थे और हैं?
7. जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों में बिल पास कराने और टेंडर देने के बदले 2ः से 3.5ः तक का फिक्स्ड कमीशन चलता था। क्या यह भ्रष्टाचार में नग्न सरकार के ‘‘जीरो टॉलरेंस’’ के दावों की धज्जियां नहीं उड़ाता?
8. क्या सरकार रिशुश्री और उनसे संबंधित कंपनियों को मिले सभी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराएगी? या सरकार को चिंता है कि उनके अपने प्रिय पोषित अधिकारी फंस ना जाएं?
9. क्या यह संयोग है कि उसकी ठमदमपिबपंतल कंपनियाँ गुजरात से हैं इसलिए उसे बचाया जा रहा है?
10. रिशु श्री द्वारा अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेशी यात्राओं, एयर टिकट और महंगे गिफ्ट्स का खर्च उठाने की बात सामने आई है। गृह विभाग, म्व्न्, निगरानी और खुफिया विभाग (प्दजमससपहमदबम ठनतमंन) इस वित्तीय लेन-देन से बेखबर क्यों थे? या सरकार से उन्हें बेखबर रहने का ढोंग करने के लिए कहा गया था?
11. छापेमारी में रिशु श्री के पास से 99 संपत्तियों के डीड और करोड़ों की नकदी/जेवरात मिले हैं। बिहार की जनता जानना चाहती है कि एक ठेकेदार के पास राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा कैसे चला गया?
12. सरकार केवल ‘‘छोटी मछलियों’’ और कुछ चुनिंदा अधिकारियों को बलि का बकरा बना रही है। इस सिंडिकेट के शीर्ष पर बैठे असली राजनीतिक आकाओं और ‘‘अमृत’’ पान करने वाले अधिकारियों के नाम कब सामने लाए जाएंगे?
13. जिन विभागों में यह महाघोटाला हुआ, उनके विभागीय मंत्रियों ने अभी तक अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया है?
14. सरकार को सभी जानकारी उपलब्ध हो जाने के बाद भी एक साल से अधिक का समय लगा। म्क् के कहने के बावजूद भी बिहार पुलिस ने महीनों तक थ्प्त् क्यों दर्ज नहीं की थी? क्या यह देरी सबूतों को मिटाने, ‘‘अपनों’’ को बचाने और फाइलें दबाने के लिए की गई थी?
15. कुछ अधिकारी इस घोटाले को दबाने के लिए दूसरे माध्यमों का सहारा ले रहे हैं? बिहार सरकार के वकील रिशु श्री के खिलाफ कोर्ट में क्यों उपस्थित नहीं हुए?
16. कोसी बेसिन विकास परियोजना और गुजरात की कंपनी को कोसी बराज का ठेका दिलाने में टेंडर माफिया रिशु श्री ने मदद की। बिहार के बाढ़ नियंत्रण और सुरक्षा से जुड़े इतने संवेदनशील प्रोजेक्ट में इतनी आसानी से भ्रष्टाचार कैसे हो जा रहा है?
17. क्या सरकार का पूरा आंतरिक ऑडिट सिस्टम और विजिलेंस विभाग पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है जो इस स्केल के महाघोटाले को समय पर उजागर नहीं कर सका या सभी इस भ्रष्टाचार में कहीं न कहीं से लिप्त हैं?
18. जब राज्य में सब कुछ ई-टेंडरिंग (म.ज्मदकमतपदह) के जरिए होता है, तो ठश्रच्.श्रक्न् सरकार के पाले-पोसे टेंडर माफिया का सिंडिकेट डिजिटल पोर्टल को कैसे मैनिपुलेट और मैनेज कर रहा था?
19. एसवीयू ने 4000 पन्नों की चार्जशीट में सिर्फ 7 मुख्य आरोपियों को नामजद किया है और कहा है कि अन्य के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। यह बाकी बचे रसूखदार अधिकारियों और नेताओं को ‘‘क्लीन चिट’’ देने की जल्दबाजी नहीं है तो क्या है?
20. यह छक्। का संयोग कहिए या प्रयोग, सभी बड़े घोटालों में दबाव पड़ने पर अगर किसी प्रशासनिक अधिकारी की दिखावटी गिरफ्तारी करनी-करानी है या उसे बलि का बकरा बनाना है तो वह दलित-पिछड़े और मुस्लिम समुदाय का ही अधिकारी क्यों होता है?
सृजन घोटाले में भी वही हुआ, प्रश्न पत्र घोटाले में भी वही हुआ, और अब इस रिशु श्री घोटाले में भी वही हुआ? तब भी अनुसूचित जाति वर्ग के सुधीर कुमार, संजीव हंस, योगेश सागर इत्यादि को ही अभियुक्त बनाकर जेल भेजा जाता है।
21 वर्षों की छक्। सरकार का भ्रष्टाचार के मामले में ैलेजमउंजपब थ्ंपसनतम व िळवअमतदंदबम का रिकॉर्ड स्थापित किया है। नीतीश कुमार जी इन सब भ्रष्टाचारियों के द्रोणाचार्य हैं। एक बात बता दूँ, बिहार के चंद अधिकारी विश्व के सबसे भ्रष्टतम अधिकारी हैं। एनडीए सरकार में नौकरशाही का इतना बोलबाला है कि जनप्रतिनिधियों की कहीं कोई सुनवाई नहीं है।
क्या इतने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार बिना सत्ता में बैठे लोगों की सीधी या परोक्ष मदद के हो सकता है? अगर मुख्य साजिशकर्ता पर्दे के पीछे ही रहें और सिर्फ छोटे-मोटे लोग ही पकड़े जाएं, तो इस भ्रष्टाचार का असल किरदार कोई और ही है।
रिशु श्री तो छोटी सी झलकी है। अधिकारियों के बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों की कंपनियों और कंसल्टेंसी फर्म्स की जांच होनी चाहिए कि ये किस-किस माध्यम से किस-किस विभाग में घुसे हुए हैं और कैसे हर विभाग में प्लांटेड अधिकारियों से कैसे टेंडर मैनेज करते और करवाते हैं।
हम कहते थे नीतीश कुमार मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, उन्हें डिमेंशिया, अल्जाइमर संबंधित बीमारी है, अब सबके सामने है। हमने यह भी कहा था कि नीतीश कुमार का नाम लेकर बीजेपी अपना ब्ड बनाएगी और वह उन्होंने किया भी।
अभी बिहार भ्रष्ट अधिकारियों के हाथ में है। ब्ड अपरिपक्व, अदूरदर्शी, नाकाबिल है। अधिकारी जानते हैं कि बड़बोले और बतोलेबाज ब्ड में कितनी गहराई है, कितनी समझ, विवेक और योग्यता है।
बताइए, ये ब्ड निवेश लाने की बजाय बिहार जैसे गरीब राज्य के पैसे से बने ढांचे को 1 रुपये में व्यापारियों को सौंप रहे हैं जो बिहारवासियों का दोहन करेंगे। रुपये में सैकड़ों एकड़ जमीन सौंप रहे हैं। ये अनूठा अंगूठा छाप ब्ड है जो सिर्फ दिल्ली के इशारे पर स्टाम्प लगाते हैं। ये ऐसे ब्ड हैं जो केवल भारी भरकम सुरक्षा और बड़ा आवास प्राप्त कर ही संतुष्ट हैं। दिल्ली वाले सारे अनैतिक और गलत काम कराएंगे और ये खुशी-खुशी करेंगे।
इस संवादाता सम्मेलन में प्रदेष अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उदय नारायण चैधरी, पूर्व मंत्री आलोक मेहता, पार्टी के प्रदेष मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव, प्रदेष प्रधान महासचिव रणविजय साहू, वरिष्ठ नेता फैयाज आलम कमाल, प्रदेष प्रवक्ता अरूण कुमार यादव मौजूद थे।
