बिहार जद (यू) अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने सोमवार को बयान जारी कर लालू परिवार को घोटालों का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बताया और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें दूसरों को नसीहत देने और भ्रष्टाचार पर फर्जी ज्ञान बांटने से पहले अपने माता-पिता के ‘भ्रष्टाचार और जंगलराज के काले अध्याय’ को पलटकर जरूर देखना चाहिए।

श्री उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि लालू परिवार ने सत्ता में रहते हुए सिर्फ घोटालों का अंबार खड़ा किया, प्रदेश के खजाने का बंटाधार कर अपनी तिजोरी भरने का काम किया और बिहार को बदहाली के गर्त में धकेल दिया, जिसका दीर्घकालिक दुष्परिणाम आज भी राज्य की जनता भुगत रही है।
लालू परिवार के खिलाफ आधा दर्जन से अधिक घोटालों के मामले कोर्ट में हैं, जिसके नतीजा है कि आज पूरा परिवार अदालतों के चक्कर लगाने को मजबूर है। तेजस्वी यादव को स्मरण होना चाहिए कि कुछ महीने पूर्व ही ‘लैंड फाॅर जाॅब’ मामले में कोर्ट ने भी लालू परिवार पर सख्त टिप्पणी करते हुए इन्हें ‘अपराधिक सिंडिकेट’ बताया था, जबकि चारा घोटाले में राजद सुप्रीमो स्वयं सजायाफ्ता हैं। फिर किस नैतिक अधिकार के साथ तेजस्वी यादव भ्रष्टाचार पर उपदेश दे रहे हैं?

पूरा बिहार इस बात का गवाह है कि जब-जब सत्ता लालू परिवार के हाथों में रही, तब-तब इन्होंने जनहित को दरकिनार कर सत्ता का इस्तेमाल सिर्फ परिवार की संपत्ति बढ़ाने और निजी हित साधने के लिए किया। श्री कुशवाहा ने कहा कि तेजस्वी यादव स्वयं भी घोटाले के आरोपों में चार्जशीटेड हैं, इसलिए उन्हें भ्रष्टाचार पर प्रवचन देने से पहले आईना देखना चाहिए।
वर्ष 2005 से पहले का बिहार कभी भ्रष्टाचार और जंगलराज का प्रतीक था, जहाँ पूरी शासन व्यवस्था पूरी तरह से चैपट हो चुकी थी। 2005 में सत्ता संभालने के बाद मा0 श्री नीतीश कुमार ने अपनी कुशल और दूरदर्शी नीतियों के बल पर बिहार को विकास के पथ पर अग्रसर किया और सुशासन की एक नई लकीर खींची। आज विकास विरोधी और जनविरोधी विपक्ष को बिहार का विकास पच नहीं रहा है, इसीलिए ये अनावश्यक हो-हल्ला मचाकर जनता को भ्रमित करने की नाकाम कोशिश में जुटे हैं।
