मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज जे०डी० वीमेंस कॉलेज के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने जे०डी० वीमेंस कॉलेज में उपस्थित छात्राओं के साथ संवाद कर शैक्षणिक गतिविधियों और समस्याओं के बार में जानकारी ली।

इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। राज्य के विद्यार्थियों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के लिए ‘विद्यार्थी सहयोग पोर्टल’ एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक, छात्रावास एवं अन्य समस्याओं तथा सुझावों का त्वरित समाधान करना है। यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क और गोपनीय है तथा विद्यार्थी सहयोग शिविर से संबंधित जानकारी हेतु हेल्पलाइन नम्बर 1100 उपलब्ध है। छात्रों की शिकायतों पर 10 दिनों में कार्रवाई शुरू न होने पर 11वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से स्वतः नोटिस जारी होगा और अधिकतम 30 दिनों के भीतर हर हाल में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा। विद्यार्थी सहयोग पोर्टल पर कभी भी ऑनलाइन परिवाद दर्ज कर सकते हैं। परिवाद दर्ज करने की तिथि से 30 दिनों के अंदर उनका निष्पादन सुनिश्चित कर आवेदक को लिखित सूचना दी जायेगी। हर महीने के चौथे मंगलवार को शिक्षण संस्थानों में शिविर आयोजित होंगे, जहां छात्र सीधे अपनी समस्याएं और सुझाव रख सकेंगे। 25 अगस्त से बिहार के सभी स्कूलों एवं छात्रावासों में विद्यार्थी सहयोग अभियान शुरू किया जायेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सहयोग शिविर के माध्यम से प्राप्त 6.42 लाख आवेदनों में 96 प्रतिशत मामलों का निस्तारण किया जा चुका है। व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। शिकायत पर 10 दिन तक कार्रवाई नहीं होने पर 11वें दिन स्वतः पहला नोटिस, 20वें दिन दूसरा और 25वें दिन तीसरा नोटिस जारी होता है। इसके बाद भी 30 दिन तक समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई की व्यवस्था है। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूती मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उनके अपने राज्य में उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा के लिए बाहर जाने की मजबूरी न हो। इसी उद्देश्य से उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। आजादी के बाद लंबे समय तक राज्य में सरकारी डिग्री कॉलेजों की संख्या सीमित रही, लेकिन अब एक साथ 211 नए डिग्री कॉलेज खोलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। साथ ही 342 बी०एड० कॉलेजों में डिग्री पाठ्यक्रम की सहमति से उच्च शिक्षा के अवसरों का विस्तार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक किफायती बनाया जा रहा है। 10 रूपये में इंजीनियरिंग और 5 रूपये में पॉलिटेक्निक शिक्षा जैसी पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के माध्यम से करीब 18,000 करोड़ रूपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है। 534 प्रखंडों और प्रमुख शहरों को मिलाकर 551 स्थानों पर मॉडल स्कूल व्यवस्था विकसित करने तथा विद्यार्थियों को घर से पढ़ाई के लिए लाइव शिक्षक सहयोग उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार की प्रगति में महिलाओं और बालिकाओं की शिक्षा एवं सशक्तीकरण की महत्वपूर्ण भूमिका है। आंगनबाड़ी, पोषण, पोशाक तथा मैट्रिक, इंटर और स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं के लिए प्रोत्साहन योजनाओं के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी सहायता दी जा रही है। सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत तथा पंचायती राज एवं स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण ने उनकी भागीदारी को नई मजबूती दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार आज विकास और परिवर्तन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। झारखंड विभाजन के समय लगभग 6 हजार करोड़ रूपये के बजट से आगे बढ़ते हुए राज्य का बजट अब 3 लाख 47 हजार करोड़ रूपये के स्तर तक पहुंचा है। बिहार की पहचान केवल अपने वर्तमान विकास से नहीं, बल्कि पाटलिपुत्र, नालंदा, विक्रमशिला और आचार्य चाणक्य की महान ज्ञान परंपरा से भी है। इस गौरवशाली विरासत को आधुनिक विकास से जोड़ते हुए बिहार को विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ही बिहार की समृद्धि और विकसित भारत की मजबूत नींव बनेगा। सरकार का संकल्प है कि बिहार का कोई भी विद्यार्थी अवसरों के अभाव में पीछे न रहे और शिक्षा, कौशल एवं रोजगार के माध्यम से अपने भविष्य के साथ-साथ राज्य और देश के भविष्य को भी नई दिशा दे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपनी समस्यायें और सुझाव खुलकर सरकार तक पहुँचायें। बिहार के विद्यार्थी आगे बढ़ेंगे तभी बिहार समृद्ध होगा और विकसित भारत का लक्ष्य पूरा होगा।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री श्री मिथिलेश तिवारी, उच्च शिक्षा मंत्री श्री संजय सिंह टाईगर, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री दीपक कुमार, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो० सुहैल, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री राजीव रौशन, युवा, रोजगार एवं कौशल विभाग के सचिव श्री कौशल किशोर, पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री उपेन्द्र प्रसाद, जे०डी० विमेंस कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो० मीरा कुमारी सहित अन्य वरीय अधिकारी एवं छात्रायें उपस्थित थीं।
