बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने पूरे प्रदेश को जानकी नवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां हर बिहारी की अस्मिता का प्रतीक हैं ।
सीता नवमी के अवसर पर श्री सिन्हा ने कहा कि 500 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली का पुनरुद्धार हुआ । यह हम सभी बिहारवासियों की सामूहिक जिम्मेवारी भी है कि पुनौरा धाम में तो माता सीता का भव्य मंदिर बनना ही चाहिए, जिसकी शुरुआत भी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मां सीता से जुड़े सभी स्थलों का ‘जानकी कॉरिडोर’ के रूप में विकास होना चाहिए । इससे न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और संवर्द्धन होगा बल्कि समग्र आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

श्री सिन्हा ने कहा कि सीतामढ़ी का विकास शुरू से हमारी डबल इंजन की सरकार की प्राथमिकता रही है। पिछले कैबिनेट में ही तय किया गया है कि बिहार में 11 नये टाउनशिप विकसित किये जाएंगे। जिनमें सीतामढ़ी भी शामिल है ।साथ ही मां जानकी प्रकट-स्थली को ‘सीतापुरम’ के नाम से विश्वस्तरीय आध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है ।बीते अगस्त माह में केंद्रीय गृह मंत्री माननीय अमित शाह एवं तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार द्वारा पुनौरा धाम अवस्थित मां जानकी मंदिर के पुनर्निर्माण के शिलान्यास एवं भूमिपूजन किया गया । 882 करोड़ रुपए की ‘मां जानकी मंदिर पुनरुद्धार परियोजना’ से मंदिर एवं परिसर का समग्र विकास तो होगा ही इस परियोजना में मंदिर परकोटा का निर्माण, तीर्थ यात्री सुविधा केंद्र, ऑडिटोरियम, यात्री अतिथि गृह, माता जानकी कुंड घाट, भंडारा स्थल, मंदिर प्रवेश द्वार और जन सुविधाओं का समेकित विकास भी शामिल है।

श्री सिन्हा ने आगे कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 4553 करोड़ की लागत से नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी-दरभंगा तथा सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर के 256 किमी लंबे रेल लाइन के चौड़ीकरण करा रही है । वहीं अयोध्या से सीतामढ़ी को जोड़ने वाली 3100 करोड़ की लागत वाली 453 किमी लंबे राम-जानकी मार्ग को भी विकसित किया जा रहा है । आने वाले दिनों में रामायण सर्किट के तहत इस क्षेत्र का कॉरिडोर आधारित विकास भी सुनिश्चित किया जाएगा।
श्री सिन्हा ने कहा कि बतौर कृषि मंत्री हमने भी मां जानकी की जन्मभूमि से ही पिछले 16 अप्रैल को राज्यव्यापी ‘किसान कल्याण संवाद यात्रा’ की शुरुआत की है । क्योंकि मां जानकी का प्रकट होना वास्तव में कृषि संस्कृति के शुरुआत भी है । इसलिए बिहार में कृषि सहित अन्य क्षेत्रों के समग्र विकास की राह मां जानकी की जन्मभूमि के पुनरुत्थान के बिना तय नहीं हो सकती ।
