जनता दल (यू) के प्रदेश कार्यालय, पटना में व्यवसायिक एवं उद्योग प्रकोष्ठ द्वारा दानवीर एवं शूरवीर भामाशाह की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नीतीश कुमार एवं श्री निशांत कुमार सहित दोनों उप-मुख्यमंत्री श्री विजय कुमार चैधरी, श्री बिजेंद्र प्रसाद यादव एवं जदयू विधायक दल के नेता श्री श्रवण कुमार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मा0 विधान पार्षद सह कोषाध्यक्ष श्री ललन कुमार सर्राफ ने की, जबकि मंच संचालन श्री चंदन कुमार सिंह द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य सचेतक श्री संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व सांसद श्री चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी, राष्ट्रीय महासचिव श्री अशोक चैधरी, राष्ट्रीय प्रवक्ता सह सचिव श्री राजीव रंजन प्रसाद, श्रीमती लेशी सिंह, श्री रत्नेश सदा, श्रीमती शीला मंडल, श्री महेश्वर हजारी, श्री संजय सिंह, श्री हरिनारायण साह, श्री दुलाल चंद गोस्वामी, मा0 विधायक श्रीमती श्वेता गुप्ता, श्री विशाल साह, श्रीमती सोनम सरदार, मा0 विधान पार्षद श्री खालिद अनवर, प्रो. नवीन आर्य चंद्रवंशी, डाॅ0. अमरदीप, प्रो. अप्सरा, अरविंद निराला, श्री साबिर अली, श्री गुँजेश्वर साह, व्यवसायिक एवं उद्योग प्रकोष्ठ के श्री धनजी प्रसाद, श्री वासुदेव कुशवाहा, श्री कमल नोपानी, श्रीमती कंचन गुप्ता, श्री अनंत कुमार गुप्ता, श्री आनंद कुमार, डाॅ0 धर्मेन्द्र चंद्रवंशी, श्री राहुल खंडेलवाल, श्री गणेश साव, सरदार कमलजीत सिंह, श्री रामनरेश राम, श्री नगीना चैरसिया, श्री सुजीत पाठक सहित व्यवसायिक एवं उद्योग प्रकोष्ठ के प्रदेशभर से बड़़़़ी संख्या में आए पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता कार्यक्रम में शामिल हुए
कार्यक्रम के दौरान सभी उपस्थित अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं ने भामाशाह के तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके त्याग, समर्पण एवं राष्ट्रभक्ति के आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री निशांत कुमार ने कहा कि जब भी दानवीरता और राष्ट्रभक्ति की बात होती है, भामाशाह का नाम बडे़ सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब महाराणा प्रताप अकबर के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, उस कठिन समय में भामाशाह ने न केवल अपनी पूरी संपत्ति दान कर दी, बल्कि अपने दोनों पुत्रों को भी मातृभूमि की रक्षा के लिए सेना में भेजा, जो आगे चलकर वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि भामाशाह का जीवन हमें यह सिखाता है कि धन की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उसका उपयोग समाज और राष्ट्रहित में किया जाए। उनका जीवन निस्वार्थ सेवा, उदारता और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण है।
श्री श्रवण कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भामाशाह के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में कार्य करना चाहिए। उनके आदर्शों और नीतियों को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज की बेहतरी के लिए समर्पित भाव से काम करना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि भामाशाह राष्ट्रभक्ति के प्रतीक थे। मुगलों के खिलाफ संघर्ष में उनका योगदान अतुलनीय है और उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

श्री ललन कुमार सर्राफ ने कहा कि भामाशाह के आदर्शों पर चलकर मा0 श्री नीतीश कुमार ने बिहारवासियों के हित में अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, विशेषकर व्यवसायिक वर्ग के सम्मान और सुरक्षा को पुनः स्थापित करने का कार्य किया है। श्री नीतीश कुमार की सुशासन नीति के कारण आज बिहार का व्यवसायिक वर्ग स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रहा है तथा बिना किसी भय के अपने कार्य-व्यवसाय को आगे बढ़़ा रहा है। उन्होंने आगे आह्वान किया कि भामाशाह जयंती के पावन अवसर पर हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि श्री नीतीश कुमार के विकास कार्यों को जन-जन तक पहुंचाएं और बिहार के उज्ज्वल भविष्य को मा0 निशांत कुमार के नेतृत्व में और अधिक मजबूती प्रदान करें।
श्री संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी ने कहा कि भामाशाह की जयंती आज पूरे प्रदेश में राजकीय समारोह के रूप में मनाई जा रही है, यह माननीय श्री नीतीश कुमार की देन है। उन्होंने कहा कि एक समय था जब व्यवसायिक वर्ग असुरक्षा के कारण पलायन करने को मजबूर था, लेकिन श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में कानून का राज स्थापित हुआ और प्रदेश में शांति एवं विश्वास का वातावरण बना। आज व्यवसायिक वर्ग पूर्ण सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसाय का संचालन कर रहा है।

श्रीमती लेसी सिंह ने कहा कि जब महाराणा प्रताप संकट के दौर से गुजर रहे थे, उस समय भामाशाह ने अपनी पूरी संपत्ति दान कर राष्ट्रधर्म का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भामाशाह सामाजिक समरसता के प्रतीक थे। उनके आदर्शों पर चलकर हमें समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए, तभी विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है।
श्री रत्नेश सदा ने कहा कि राष्ट्रसेवा के क्षेत्र में भामाशाह का योगदान इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। उनका जीवन त्याग, समर्पण और देशभक्ति की प्रेरणा देता है। वे हम सभी के लिए एक महान प्रेरणास्रोत हैं, जिनके आदर्शों पर चलकर समाज और राष्ट्र की सेवा का मार्ग प्रशस्त होता है।
