बिहार में गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने और राज्य में गन्ना उत्पादन को नई गति देने के लिए गन्ना उद्योग विभाग एक ‘संपूर्ण इकोसिस्टम’ विकसित कर रहा है। किसानों को खेती के लिए आसान शर्तों पर और समय पर ऋण (क्रेडिट) उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सोमवार को गन्ना उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री के. सेंथिल कुमार ने नाबार्ड (NABARD) के प्रतिनिधियों और को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।
इस बैठक का मूल उद्देश्य किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए एक ऐसा तंत्र विकसित करना है , जिससे उत्पादन के दौरान उन्हें आर्थिक बाधा का सामना न करना पड़े। अपर मुख्य सचिव ने को-ऑपरेटिव बैंक के एमडी से कहा कि गन्ना किसानों को समय पर और न्यूनतम ब्याज दर पर ऋण सुनिश्चित कराया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी उपज बढ़ा सकें।

ऋण व्यवस्था को सुलभ बनाने के साथ-साथ, इस नए इकोसिस्टम के तहत कृषि संसाधनों की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। किसानों को गन्ना उत्पादन के लिए आवश्यक विभिन्न रसायन, जैविक उत्पाद और आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद में विभाग द्वारा हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
विभाग का लक्ष्य स्पष्ट है कि राज्य में वर्तमान में संचालित चीनी मिलों के साथ-साथ भविष्य में स्थापित होने वाली नई चीनी मिलों के लिए भी गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए विभाग द्वारा गन्ना विकास की दिशा में व्यापक कदम उठाए जा रहे हैं।

साथ ही गन्ना उद्योग विभाग के साथ बैठक में चीनी मिल क्षेत्रों में आ रही जलजमाव की समस्या पर भी ध्यान आकृष्ट किया गया। इस समस्या के स्थायी निराकरण के लिए अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा इससे निपटने के विभिन्न कारगर उपायों पर चर्चा की गई।
